स्कूल की मस्त माल के गुलाबी भोसड़े में लंड डालकर चोदा

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हाय दोस्तों, मैं सनी कश्यप आप सभी का नॉन वेज स्टोरी में स्वागत करता हूँ। मैं रोज नॉन वेज स्टोरी की मस्त सेक्सी स्टोरी पढता हूँ, आज आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं सीतापुर का रहने वाला हूँ। मैंने कॉलेज में बी ए में एडमीशन ले लिया था और हमारी क्लास चलना भी शूरु हो गयी थी। क्लास में २५ लड़कियाँ थी, पर जादातर तो काली कलूटी और बिना किसी काम की थी। १० लड़कियों की थी तो शादी हो चुकी थी और वो पहले से चुद चुकी थी अपने अपने पतियों से।

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कुछ लडकियाँ तो लड़कों से जादा बात नही करती थी, शायद वो डरती थी की कहीं कोई लड़का उनको चोद ना दे। कुल मिलाकर ३ लड़कियाँ की ऐसी थी जो लडकों से खूब मीठी मीठी बात करती थी और चुदवाने के मूड में थी। सारी लड़कियों में प्रिया रानी नाम की लड़की तो बहुत मस्त माल थी। मेरा उसको चोदने का बड़ा दिल था और उसको देखने की मेरा लंड खड़ा हो जाता है। वो ५ फुट ४ इंच की थी, गोरी, भरे हुए जिस्म वाली, उसके ओंठ तो इतने मस्त थे की जब मैं उसको देखता था तो दिल करता था की उसके मुंह में ही लंड देकर खूब जीभर कर चुसवाउँ और चोद चोद कर उसकी बुर फाड़कर रख दूँ।

धीरे धीरे मैं प्रिया रानी को देखकर मुठ मारने लगा। एक दिन दोपहर के २ बजे थे, मैं अपने आर्ट साइड वाली बिल्डिंग में कॉलेज में ही टहल रहा था। पता नही क्यों आज मेरा मन कुछ परेशान था,और आज क्लास में जाने का मन नही था। मैं ४ कमरे पार कर गया और किनारे एक बालकनी से खड़ा होकर सिगरेट फूकने लगा। इतने में मुझे कॉलेज के ही एक कमरे से चुदाई की गर्म गर्म ओह्ह्ह्ह माँ… अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…. उ उ उ…चूसो चूसो…..और चूसो…मेरी चूत को….अच्छे से पियो मेरी बुर!!” की तेज तेज आवाज सुनाई देने लगी। मेरा तो दिमाग की हिरन हो गया। दोस्तों, वो कमरा मेरे वाले कमरे से ४ कमरे छोड़ कर था, जहाँ से गर्म गर्म आवाज आ रही थी। मैंने सिगरेट का एक बड़ा काश खीचा और उस कमरे की तरफ बढ़ा। दरवाजा खुला हुआ था, मैं अंदर चला गया। बहुत सारी लम्बी लम्बी कॉलेज की बेंचों के बीच में दो लोग गर्म गर्म चुदाई में डूबे हुए थे। मैंने कोई आवाज नही थी और बैठकर देखने लगा की आखिर ये काण्ड कौन कर रहा है। जब मैं उन लोगों को पहचान पाया तो मेरी गांड फट गयी। मेरा जिगरी दोस्त कैलाश मेरे क्लास की सबसे मस्त माल प्रिया रानी को घपाघप चोद रहा था। “बहनचोद!!!…..इसने तो आज प्रिया रानी को चोद लिया भाई!!” मैंने खुद से कहा

ये गर्मगर्म चुदाई वाला काण्ड देखकर तो मेरा लौड़ा बिलकुल खड़ा हो गया था। मैंने अपनी सिगरेट पैर से कुचल कर बुझा दी और किसी चोर की तरह वही नीचे फर्श पर बैठकर छुपा रहा और कैलाश और प्रिया रानी की गरमा गर्म चुदाई देखता रहा। कैलाश ने हमारे क्लास की सबसे जानदार लौंडिया को पटा लिया था और आज उसकी चूत की सीटी खोल रहा था। प्रिया रानी जैसी चुदासी लड़की के कपड़े किनारे बेंच पर रखे थे। वो पूरी तरह से नंगी थी और मैं उसके चिकने, नंगे और चुदवाने लायक जिस्म के दर्शन कर सकता था। एक काम मैंने अच्छा किया की अपना स्मार्टफोन लेकर उसका चुदाई वाला विडियो बनाने लगा। इससे मैं बाद में कैलाश को ब्लेकमेल कर लूँगा और प्रिया रानी की नई नई चूत को जीभ लगाकर चाटूंगा और उसका भोग लगाऊंगा।

मैं सब कुछ टकटकी बाधकर देख रहा था। दोनों खामोश थे। प्रिया रानी मस्त चुदने के मूड में थी, कैलाश मिश्र मेरा दोस्त, उस पर पूरी तरह से लेटा हुआ था और प्रिया के गुलाबी बेहद खूबसूरत स्ट्राबेरी जैसे होठ को मस्ती से चूस रहा था। दोनों एक दूसरे को एकटक ताक रहे थे, दोनों चुदाई के मूड में थे। ये सब देखकर तो मेरा लंड खड़ा हो गया, अगर इस समय कोई तमंचा मेरे पास होता तो अपने दोस्त के सर पर लगा देता और प्रिया रानी को मैं चोद लेता इसी वक़्त। बंद कमरे में ये गरमा गर्म चुदाई देखकर मेरे मन में अजीब अजीब विचार आ रहे थे। कैलाश ने हमारे क्लास की सबसे मस्त माल को पटा लिया था, मेरे क्लास के और लड़के जैसे मैं, परमजीत, संदीप, देवेन्द्र, अजय सब के सब प्रिया रानी को चोदना चाहते थे, पर साला कैलाश तो बाजी ही मार ले गया। हम लोग प्रिया को देख देख मुठ ही मारते रह गये और ये साला तो माल को चोद रहा है। थोड़ी जलन भी हुई कैलाश को देखकर। पर तसल्ली थी की प्रिया रानी जैसी मस्त माल आज चुद गयी। उसकी चूत में आज लौड़ा चला गया, अब उसकी गिनती एक अल्टर में होगी, इसी बात की खुसी थी।

मैं दीवाल के किनारे नीचे बैठकर छुपा हुआ था। कैलाश बड़ी देर तक प्रिया रानी के रसीले होठ चूसता रहा, फिर उसके दूध पीने लगा। उफफ्फ्फ्फ़…..मादरचोद!! दूध भी सीधे ३६ साइज के। इसी से आप पता लगा सकते है दोस्तों कि गांडू को कितना जादा मजा मिल रहा होगा। मैं उसे अपनी आँखों से प्रिया के मस्त मस्त आम पीते हुए देख रहा था। मेरा जिगरी दोस्त कैलाश मुंह में भर भरके प्रिया के दूध पी रहा था। प्रिया की बड़ी बड़ी नशीली छातियाँ देखकर मेरा लंड तो कितना परेशान हो गया था। दिल कर रहा था की अभी मुठ मार लूँ या इस अल्टर माल की चूत में जाकर अभी लौड़ा डाल दूँ।

मैं छुपा हुआ था। प्रिया के दूध के किनारे किनारे चोकलेटी रंग के बड़े बड़े घेरे थे, हर हिन्दुस्तानी लड़के की तमन्ना होती है की इसी तरह के बड़े बड़े घेरे वालो कोई लड़की के बूब्स चूसने को मिल जाए। हम सारे लड़के लड़कियों की चूची पीने के बहुत प्यासे होते है, कितना मजा, कितना सकून मिलता है हम लड़को को लड़कियों के मस्त मस्त आम पीने में। मैं ये सब अपनी नंगी आँखों से देख रहा था। कोई २० मिनट तक मेरा जिगरी दोस्त कैलाश प्रिया रानी के दूध पीता रहा। फिर उसने अपना ७ इंच का मोटा लौड़ा हाथ इ ले लिया और उसकी चूत पर उपर से नीचे लगाकर घिसने लगा। प्रिया “आह आह राजा….आजजजज….मुझे कसके चोद दोदोदोदोदो…की बार बार आवाज निकाल रही थी। प्रिया रानी पूरी तरह से नंगी थी और उसका चिकना चुदासा और चोदने खाने और पेलने वाला बदन मैं साफ़ साफ़ देख सकता था। कैलाश अभी मस्ती में मूड में दिख रहा था। वो प्रिया को चोदने से पहले उसके मदमस्त जिस्म से खेलना चाहता था, इसीलिए वो अपने मोटे लौड़े के सुपादे को प्रिया रानी की चूत में नही डाल रहा था, वो बस लौड़े के सुपाडे को चूत पर उपर नीचे जल्दी जल्दी घिस रहा था। लंड खाने की तड़प और चुदने की कामुकता मैंने साफ़ प्रिया की आँखों में देख सकता था।

वो किसी प्यासी मछली की तरह तडप रही थी। पर गांडू कैलाश तो फुल इंटरटेनमेंट के मूड में लग रहा था। मैं साफ़ साफ देख रहा था की वो बार बार अपने मोटे लौड़े को प्रिया रानी की चूत पर घिस रहा था। चूत लंद खाने को तडप रही थी और इधर गांडू कैलाश को मस्ती सूझ रही थी। फिर वो प्रिया के उपर लेट गया और उसके दूध पीने लगा। प्रिया की कमर बहुत ही सेक्सी और कमनीय थी, अगर कोई लौंडा प्रिया की नशीली पतली और सेक्सी कमर को देख लेता तो उसको चोद के ही मानता, चाहे उसे जेल क्यों ना जाना पड़ता। फिर कैलाश प्रिया रानी जैसी मस्त लौंडिया का पेट अपने जीभ से चूसने लगा फिर नाभि में अपना लौड़ा गड़ाने लगा। प्रिया उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. हा हा हा की बार बार आवाज करने लगी।

कुछ देर तक प्रिया रानी की चूत को अपने मोटे ७ इंची लौड़े से उपर नीचे घिसने के बाद आखिर वो पल आ गया जिसको प्रिया रानी को बड़ा इंजतार था। मेरे जिगरी दोस्त कैलाश मिश्रा ने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और जोर का धक्का मारा। लौड़ा सट की आवाज करता हुआ, प्रिया रानी के लाल लाल मदमस्त भोसड़े में अंदर घुस गया। उसे बड़ी ऐश मिली। ““कैलाश!!…मेरे याररररर….मेरे जानम…….आआआआआ…औररर….जोररर से चोदोदो दो….सी सी सी….ईई..माँ माँ” प्रिया जैसी सुंदर लौंडिया चिल्लाने लगी। कैलाश की जिन्दगी में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक दिन था, क्यूंकि वो हमारे क्लास की सबसे मस्त लौंडिया प्रिया की चूत मारने को बहुत दिन से बेक़रार था। कैलाश सब कुछ जल्दी नही करना चाहता था। प्रिया रानी की मदमस्त चुदाई का एक एक लम्हा वो जीना और महसूस करना चाहता था। कैलाश ने नीचे ताका तो प्रिया का सपाट भोसड़ा उसे साफ़ साफ़ दिख गया।

गुलाबी भोसड़े का उसने दर्शन किया। गुड़हल के फूल जैसे दिखते थे प्रिया रानी की चूत के होठ, कैलाश से गौर से देखा की उसका ७ इंच और २ इंच मोटा लौड़ा क्लास की सबसे हसीन लौंडिया के भसोड़े में अंदर तक घुस गया है, कैलाश बड़ी देर तक इस अद्भुत पल को देखरा रहा। उधर प्रिया बार बार विनती कर रही थी की कैलाश….मुझे चोदो….क्यों इतना वक़्त बर्बाद कर रहे हो। पर कैलाश गांडू तो इस पल को सदा सदा के लिए दिल में कैद करना चाहता था। फिर कुछ देर बाद प्रिया रानी के भोसड़े का अप्रतिम सौंदर्य टूट गया। मेरा जिगरी यार जिसे मैं गांडू गांडू..प्यार से और लड़को वाली मजाकिया भासा में कहता था, वो कैलाश प्रिया रानी को बड़े प्यार से खाने लगा और उसे चोदने लगा। धीरे धीरे उसका लौंडा प्रिया की चूत की गहराई नापने लगा। कितनी सुखद बात थी की क्लास की वो मस्त लौंडिया आज चुद रही थी। धीरे धीरे कैलाश अपनी कमर और तेज तेज चलाने लगा और प्रिया को चोदने खाने लगा।

प्रिया की आँखें बंद हो गयी, उसके बड़े बड़े मम्मे किसी गेंद की तरह इधर उधर हिलने लगे। वो चुद रही थी, कैलाश उसके बंद आँखे के सौंदर्य को अपनी आँखों से पी रहा था। सचमुच वो बड़ा किममत वाला था, मैं, परमजीत, संदीप, देवेन्द्र और ना जाने कितने क्लास के लडके सारा दिन टुकुर टुकुर बस प्रिया को ही टाडा करते थे, एक बार उसके सलवार सूट के दुपट्टे से अगर प्रिया के बड़े बड़े मम्मो के दर्शन हो जाते थे तो मेरे सारे दोस्तों के लंड खड़े हो जाते थे, सभी प्रिया रानी को चोदने के मन ही मन ख्वाब देखने लगते थे, पर लाटरी लगी तो कैलाश मिश्रा के हाथ में। अब धीरे धीरे वो प्रिया के नर्म भोसड़े में अपने लौड़े की रफ्तार बढ़ाने लगा। प्रिया उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…. ऊँ..ऊँ…ऊँ करके चिल्लाने लगी और अपने सफ़ेद तेज दांतों से अपने होठ काटने लगी। इस बात में कोई शक नही है की उसे भी चुदाई में पूरा आनद आ रहा था। वो कैलाश मिश्रा का लम्बा लम्बा लौड़ा खा रही थी और मजा ले रही थी।

कुछ देर बाद कैलाश तेज तेज प्रिया रानी को चोदने लगा और तेज तेज फटके देने लगा। प्रिया जैसी लाजवंती की सासें जैसे उखड़ने लगी, उसका नर्म लचीला बदन कैलाश जैसे पट्ठे के मोटे ताजे लौड़े को झेल नही पा रहा था। अई…अई….अई……अई, इसस्स्स्स्स्स्स्स् उहह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह…..चोदोदोदो…..मुझे और कसकर चोदोदो दो दो दो” प्रिया किसी चुदासी कुतिया की तरह आवाज लगाने लगी। इसी बीच मेरे दोस्त कैलाश ने प्रिया के मुंह पर अपना मुंह रख दिया और उसके मस्त मस्त होठ पीने लगा। दोनों जवानी और चुदाई के नशे में चूर थे, दोनों एक दूसरे के होठ अपने अपने जबडे चलाकर पीने लगा। प्रिया ने कैलाश को अपनी बाहों में भर लिया और मजे से चुदवाने लगी। कैलाश प्रिय को होठ चूसते चूसते ही मजे लेकर चोदने लगा। कुछ देर बाद तो चुदाई अपने अंतिम चरण में पहुच गयी और चत चत और पट पट की आवाज मेरे कानो में जाने लगी।

दोस्तों, मैं उसी चुदाई वाले कमरे में छुपा हुआ था, मैंने अपनी पेंट खोल दी और अंडरवियर में हाथ डाल कर मैं मुठ मारने लगा। ऐसा मौका ही था, मेरे क्लास की सबसे मस्त लौंडिया आज मेरी आँखों के सामने चुद रही थी, पार्टी तो बनती थी। इसलिए मैं जल्दी जल्दी अपना लंड फेटने लगा। कैलाश मिश्रा और प्रिया मेरे बारे में जरा भी नही जान पाए, वरना वो चुदाई को अंजाम नही देते। मैं किसी चोर की तरह दीवाल के पास वाली बेंच के किनारे छुपा हुआ था, उधर प्रिया रानी जैसी मस्त लौंडिया की चुदाई चल रही थी। दोनों की चुदाई क्लाईमेक्स पर पहुच गयी थी। कैलाश हूँ….हूँ…हूँ….की आवाज निकालता हुआ हुमक हुमक कर प्रिया को चोद रहा था। चत चत पट पट की मीठी आवाज के बीच कैलाश का मोटा लौड़ा असंख्य बार प्रिया रानी के भोसड़े में घुसा और अंदर निकला। कैलाश के माथे पर चुदाई की मेहनत से पसीना निकल आया, फिर उसने अपना माल प्रिया जैसी हसीन लौंडिया के भोसड़े में छोड़ दिया। इधर मुठ मारते मारते मेरा माल भी गिर गया।

माल छोड़ते ही प्रिया किसी चुदासी रंडी सी कैलाश से चिपक गयी, और दोनों करीब आधे घंटे तक नंगे नंगे एक दुसरे के जिस्म से चिपके रहे। मेरी बी ए की क्लास की सबसे मस्त लौंडिया आज कॉलेज में ही चुद गयी थी। कितनी मस्त बात थी ये। दोनों अपने अपने कपड़े पहनने लगे। मैंने प्रिया की चुदाई का पूरा १ घंटे का विडियो बना लिया। मैं अब खड़ा हो गया और जोर जोर से ताली पीटने लगा। कैलाश मिश्रा और प्रिया ने मुझे देखा तो दोनों की गांड फट गयी।

“सनी….तुम????” कैलाश बोला

“हाँ बेटा…..यही कमरे में छुपकर तुम्हारी और प्रिया की चुदाई देख रहा था, भई एक बात तो है…..मजा तो आ गया गुरु!! प्रिया रानी को आज जो तुमने चोदा है….मैंने तो देखते ही देखते मुठ मार दी” मैंने हस्ते हुए कहा

“तुम दोनों की चुदाई की विडियो बना ली है मैंने….अब सराफत ने प्रिया की चूत दिला दो…वरना पूरे कॉलेज में अभी २ मिनट में ये विडियो भेज दूंगा!!” मैंने कैलाश को ब्लेकमेल किया। बड़ी मुस्किल से कैलाश प्रिया को चुदवाने को तैयार हुआ। उसके बाद दोस्तों, मैंने उस बंद कमरे में प्रिया रानी को आधे घंटे चोदा और उसकी गांड मारी। मैंने कैलाश से अपना वादा पूरा किया और विडियो डिलीट मार दिया, पर खुसी थी की अपने क्लास की सबसे मस्त माल की चूत तो मिल गयी। ये कहानी आप नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

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स्कूल के टोइलेट में पहली बार अपने यार से चुद गयी और फिर कई बार छिपकर चूदी

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हेलो दोस्तों, आप सभी तो तान्वी तिवारी का बहुत बहुत नमस्कार. मैं कई सालों से नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर चुदाई, सेक्स और ऐयाशी की कहानियां पढ़ रही हूँ. मैं आपको बता दूँ की मैं भी कोई कम ऐयाश नहीं हूँ. पता नहीं कितनो से चुदवाया है मैंने, पता नहीं कितनों से गांड मराई है मैंने. तो आप अभी को मैं अपनी ऐयाशी की कहानी सुनाना चाहती हूँ. मैं देखने में काफी खूबसूरत हूँ. साधे पांच फिट लम्बी हूँ. मेरा बदन भी भरा हुआ है. तो मैं सीधे कहानी पर आती हूँ. मैं तन्वी, मानवी, नीतू, शशि ४ बहने थी. हम चारों में १ २ साल के फर्क था. मैं तो १० १२ साल पहले जवान हो गयी थी, पर आप तो जानते है की हिंदुस्तान में लाइन से शादी होती है. तो मेरी ऐयासी की सूरत ऐसे हुए. जब मैं १८ साल की जवान चुदवाने लायक सामान हो आ तो मुझसे बड़ी ३ बहनों की शादी करनी थी.

मेरे डैडी मुझसे बड़ी ३ बहनों की शादी के लिए यहाँ वहां लड़का देखने लगे. मैं जान गयी की अभी ५ ६ साल तक तो मुझको लंड मिलने से रहा. तो खुद ही मुझको अपने लंड का इंतजाम करना पड़ेगा. इसलिए स्कुल कॉलेज में जो लड़का मुझको लाइन देता, मैं ले लेती और बाथरूम, टोइलेट में जाकर चुदवा लेती. हाँ , मुझको याद याद मेरी पहली चुदाई दुर्जोय नमक लडके ने स्कुल के टोइलेट में की थी. मैं उस वक्त १०वि में थी. मेरे क्लास की सभी लडकियां टोइलेट में ही जाकर अपने अपने यारों से बूर फड़वाती थी. मेरी एक सहेली कुसुम ने मुझसे कहा की मैं हमेशा क्लास में बस बैठ के पढ़ती रहती हूँ. उधर लडकियां नए नए लड़कों का नया नया लंड का रही है. कुसुम ने मुझको बताया की जो लडकियां क्लास में बैठ के बस पढ़ती ही रह जाती है, उनकी लाइफ बड़ी बोरिंग हो जाती है. आगे जब उनकी शादी होती है तो वो अपने पति को खुस नहीं रख पाती. इसलिए हर जवान लड़की की किसी न किसी लडके से जरुर चाकर चलाना चाहिए और शादी से पहले क. दोस्तों, मेरी बेस्ट फ्रेंड से मुझको समझाया. उसने मुझसे बताया की दोर्जोय जो मेरे क्लास में ही पढता है मुझको पसंद करता है और मुझसे फ्रेंडशिप करना चाहता है.

दोस्तों, धीरे धीरे मेरी दुरजोय से मुलाकते बढने लगी. मैं अभी छोटी थी , इसलिए मेरे पास कोई मोबाइल भी नयी था. इसलिए मैं और दुर्जोय लव लेटर लिख लिख कर एक दूसरे से बात करते थे. एक दिन जब हमारी हिस्टरी की बोरिंग क्लास चल रही थी, दुर्जोय से मुझको बेच के निचे से चट्टी थी की रिसेस में मैं उससे टोइलेट में आकर मिली. जब रिसेस हुआ तो मैं अपनी लेडिस टोइलेट में मूतने गयी थी. जैसे मैं अंदर गयी दुर्जोय ने मुझको अंदर खींच लिया.

दुर्जोय!! यहाँ क्यूँ बुलाया?? ये लेडिस टोइलेट है! कहीं किसी ने देख लिया तो खामखा बवाल हो जाएगा! मैंने नाराज होकर कहा

अरे तान्वी ! तू बहुत डरती है. इतना डरेगी तो कभी कुछ नहीं कर पाएगी!! दुर्जोय बोला. उसने मुझको बाँहों में भर लिया. किसी लडके से मिलने का मेरा ये प्रथम अनुभव था. आज तक तो मैं कभी अपनी किताब कापियो और पढ़ने लिखने वाली जिंदगी से बाहर नहीं आई थी. दोस्तों, मैं स्कूल की झक सफ़ेद शर्ट और नीली शोर्ट स्कर्ट पहन रखी थी. दुर्जोय ने मेरे नए नए मम्मो पर अपने हाथ रख दिया. मेरा तो दिल धड़क गया दोस्तों. उसके छूने से मेरे अंदर की किशोरी की चुदास जाग गयी थी. वो मेरे गोल गोल सोलिड गठीले स्तनो लो छुने सहलाने लगा. आज मुझको पहली बार पता चला की मैं सिर्फ एक स्टूडेंट नही बल्कि चोदने लायक एक जवान लड़की भी हूँ. मेरा दिल धक् धक करने लगा. मेरी सांसे और धडकन तेज हो गयी. बिना विलम्ब किया दुर्जोय ने अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिया.

वो मेरे होंठों की लाली चुराने लगा. मुझको बहुत अच्छा लगा. अब मैं भी बिना पीछे हटे उसके होंठों को पीने लगी. हम दोनों अब जबरदस्त चुम्बन करने लगे. कुछ देर बाद तो हम दोनों बहुत गरम हो गए. दुर्जोय ने मेरी टाई निकाल दी. मेरी उपर की गलाबंद वाकी बटन भी उसने खोल दी. वो मेरे गले पर सब जगह चुमने लगा. धीरे धीरे मेरी उत्तेजना शिकार पर पहुचने लगी. मेरे गले पर पीछे मेरे बालों के नीचे अनेक हल्के हल्के रेशे से थे. जब मेरा यार दुर्जोय मुझको वहां चूमने लगा तो एक ओर जहाँ थोड़ी गुद्गुदी लग रही थी, वहीँ बड़ा अच्छा लग रहा था. मैं तो अभी तक कापी, किताबों, पेंसिल, पेन से ही खेली थी,पर किसी विपरीत लिंग का स्पर्श कैसे होता है ये मुझको आज पता चला. दुर्जोय ने मेरी झक बिलकुल चकाचक सफ़ेद नील की हुई शर्त के उपर के बटन खोल दिए और मेरी पीठ पर हाथ फिरने लगा. अब तो मैं और भी उत्तेजित हो गयी. अब मैं चुदासी और गर्म हो गयी थी. मैंने टोइलेट की कुण्डी अंदर से ठीक से बंद कर ली थी, वरना कोई भी लड़की अचानक से वहाँ आ सकती थी. अब मस्त गोलमटोल मम्मो को दुर्जोय से वैसे बाहर से तो खूब ताड़ा था, पर आज उसे मेरे मम्मो को पास से छूने और देखने परखने का आज मौका मिला था. उसने मेरी ब्रा को ऊपर उचका आकर मेरे मम्मो को बाहर निकाल लिया जैसे डॉक्टर ओप्रसन करके पेट से बच्चा बाहर निकाल लेता है.

आह !! ओह्ह्ह माँ!! मम्मी!! मैं गरम गरम सिस्कार लेने लगी. दुर्जोय मेरे दूध से खेलता रहा. कितने दिनों बाद आज उसकी ये जवलंत खवाहिश पूरी हुई थी. आज से पहले तक उसने मेरे मम्मो या कहे मेरी इज्जत को सिर्फ सफ़ेद शर्ट स्कूली ड्रेस में देखा था, पर आज उसे इसे असली रूप में देखने का सौभाग्य मिला था. दोस्तों, दुर्जोय तो अब मेरी ओर देख ही नही रहा था, जैसे मेरे दूध, मेरी छातियाँ ही उसके लिए सबकुछ थी. आप सभी चूत के पाठकों को मैं बता दूँ की वो टोइलेट जादा बड़ी थी. बहुत छोटी थी. मुझको चोदने के लिए उसे बड़ा जातन करना पड़ेगा, ये बात तो मैं जानती थी. अब जब ये बाट साफ थी की मेरा यार मुझको स्कूल की इसी टोइलेट में चोदेगा तो अब कैसा शर्माना. दुर्जोय ने मुझको पूरा नंगा नहीं किया, क्यूंकि अब दोनों किसी आराम्दायक बेडरूम में तो थे नहीं, बल्कि एक टोइलेट में थे. थोड़ी बू भी आ रही थी. इसलिए उसने मुझको नंगा नहीं किया. न की मेरे कपड़े उतारे. बस इतना कर लिया की मुझको वो चोद ले, बस इतना ही उसने किया. मेरी शर्ट के ऊपर के ३ बटन दुर्जोय से खोल दिए और मेरे मस्ट कलश जैसा बेहद खूबसूरत मम्मो को बाहर निकाल लिया और पीने लगा. उसने इंग्लिश टोइलेट सीट का ढक्कन बंद कर दिया. अब मुझको उसपर बठने के लिए पर्याप्त सीट मिल गयी थी. दुर्जोय ने मुझको छोटी सी उस इंग्लिश सीट पर बैठा दिया था और पीछे वाश बेसिन ने टिका दिया था. दोस्तों, भला हो नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम का की वो मेरी कहानी आप तक लेकर आई है. वरना मेरी इस ऐयाशी के बारे में मैं किसी को ना बता पाती.

वो मेरे दूध पर मजे से पी रहा था. मेरे कलश जैसे खुब्सूरत मम्मे दुर्जोय के लिए किसी ट्रोफी से कम नही थी. वो मस्ती से मेरी छातियों को पीने लगा. बार बार टोइलेट का दरवाजा खुलने और बंद होने की चें चें की आवाज आती थी. लड़कियों की पदचाप की आवाज आती थी. मन तो दर भी था की कहीं खुदा न खास्ता हम दोनो को पकड़ लिया तो पता नहीं क्या होगा. इस अमर्यादित कृत्य पर हम दोनों को स्कूल से निकाला भी जा सकता है. शिक्षा के मंदिर में हम दोनो इस तरह छिपकर चुदाई को अंजाम दे रहें थे, इस लिए मेरी गांड तो फटी थी दोस्तों. जबकि दुर्जोय मस्ती से मेरे मम्मे पीने में मस्त था. लडके तो बिंदास होते है, टेंशन तो बस लडकियां की करती है. मेरे दोनों मम्मो को जीभर के पीने और मेरे नीबू का सारा रस निचोड़ने के बाद अब दुर्जोय मुझको चोदना चाहता था. उसने मेरी बड़े घेरे वाली स्कर्ट ऊपर उठा दी. उसने मेरे कपड़े उतारे नहीं, क्यूंकि वहां जगह की बड़ी किल्लत थी. मेरी महरून रंग की हल्की जाली वाली बड़ी सेक्सी पैंटी जब उसने देखि तो देखा थी रह गया. फिर उसने मेरी सेक्सी महरून पैंटी उतार दी.

अरे तान्वी!! हाई स्कूल में ही तेरी झांटे भी निकल आई!! दुर्जोय हसकर बोला

भोसड़ी के!! जब तेरी माँ हाई स्कूल में होगी तब उसकी झांटे भी निकल आई होगी, पूछ लेना अपनी माँ से!! मैंने कसकर मजाक में कहा. ओह्ह !! दुर्जोय मेरी चूत पीने लगा. कितना मजा मिला मुझको. हर बाट मैं कैसे आपको शब्दों में बताऊ दोस्तों. बस यही जानिये की बड़ा मजा मिला मुझको. दुर्जोय मेरे भोसड़े को अच्छे से पीने लगा. मेरी छातियाँ, मेरे स्तन कड़े होकर तन गए, पत्तर जैसे हो गये. आज मैंने जाना की किताब कापी से गाड़ मराने के अलावा भी एक नयी सपनीली रंगीली दुनिया है. इधर मैं मजा मारती रही, वही दूसरी ओर दुर्जोय मेरी बुर का सेवन करता था. फिर उसने अपनी स्कूल बेल्ट खोल दी. उसका लौड़ा तो कबसे मेरी बुर मारने को बेक़रार था.

ऐ तन्वी!! लौड़ा चूसेगी ?? दुर्जोय ने प्यार से पूछा

दे न भोसड़ी के !! मैंने कहा.

दुर्जोय ने अपना लौड़ा मुझको दे दिया. मैंने टोइलेट सीट की उस छोटी सी सीट पर बैठी रही और अपने यार, अपने सनम का लौड़ा चूसती रही. दुर्जोय बहुत गोरा था, इसलिए उसका लौड़ा भी बड़ा गोरा, खूबसूरत था. मैं मजे से चूसने लगी. उसके लौडे की मांसपेशिया भी खूब फूल गयी थी, जिससे चूसने में वो और मोटा लग रहा था. मैं सिर आगे पीछे करके उसका लौड़ा चूसने लगी. आज पता चला की सारी क्लास तो मैं अटेंड कर रही थी , पर इस चुदाई की क्लास में मैं आज तब ना आई थी. दुर्जोय ने अपनी आँखे बंद कर ली. निश्चित रूप से उसको भी बड़ा मजा मिल रहा था. मैंने बड़ी देर तक अपने सनम का लंड चूसा. अब दुर्जोय ने मुझको जरा पीछे कर दिया, चूत सामने आ गयी. उसना लंड लगाया और पुश किया. लंड बुर फाड़ता किसी ट्रेक्टर की तरह मेरे चूत के खेत में गुस गया. धीरे धीरे दुर्जोय मुझको चोदने लगा. कुछ देर बाद मेरी चूत रवा हो गयी. मेरा सनम मुझको अब ले रहा था.

दोस्तों, बार बार मेरे क्लास की लडकियां वह बाहर आ जा रही थी. दर लग रहा था की कहीं हम दोनों आशिकों को देख न ले. मेरा यार बिंदास बिना किसी टेंशन के मुझको पेल रहा था. कुछ देर बाद मेरी चूत पूरी तरह रवां हो गयी. अब दुर्जोय सट सट करके मुझको पेल रहा था. मैं चुदाई के महा समुन्दर में गोते लगा रही थी. मैंने अपने यार के दोनों हाथ को पकड़ रखा था. दुर्जोय ने ये साबित कर दिया की वो खिलाड़ी है. उसने टोइलेट सीट पर बैलेंस बनाये रखा और मुझको गिरने नही दिया. उसकी लंड की रगड बड़ी नशीली थी. मैं तो जैसे आज गंगा नहा गयी दोस्तों. मेरी चूत भी आज अच्छी तरह खुल गयी. दुर्जोय गच गच्च करके मुझको पेलता रहा. मैं सिस्कारियां बड़ी धीरे धीरे ले रही थी , की कहीं कोई स्टूडेंट सुन न ले. कुछ देर बाद, दुर्जोय ने रफ्तार बड़ा दी. मैं कहीं चुदवाते चुदवाते टोइलेट सीट से नीचे न गिर जाऊं , इसलिए मैंने उसके दोनों हाथों को कसके पकड़ लिया. दुर्जोय को इतना जोश चढ़ा की बहुत जोर जोर से धक्के मारने लगा. पूरी टोइलेट सीट और पीछे लगी वाश बेसिन हिलने लगी. दुर्जोय खप खप करके मुझको पेलता रहा. मैं धन्य हो गयी. चुदाई की इस पाठशाला में आज मैंने अपनी हाजरी दर्ज करवा दी. मैंने चुदाई के इस क्लास में कई ठुकाई के पाठ पढे आज. काफी देर तक उसने मुझको चोदा, फिर मेरी चूत में उसने अपना गरम गरम लावा यानि अपना माल छोड़ दिया. मैं धन्य हो गयी. आज मैं एक चुद गयी और एक सम्पूर्ण नारी बन गयी. हम दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक कर लिए. मैंने अपनी शर्ट के वो खुले वाले बटन बंद कर लिए. अपनी स्कूल टाई पहन ली. चुदवाकर मैं अपनी स्कर्ट नीचे कर ली, ठीक ही. मेरे कपड़ों में थोड़ी धूल भी लग गयी. वहीँ दुर्जोय ने भी शर्ट पैंट में डालकर बटन लगा ली. बेल्ट बाँध ली. फिर शर्ट इन कर ली. उसने होले से टोइलेट का दरवाजा खोला और बाहर झांक कर देखा.

जब उसने देखा की वहाँ बाहर कोई लड़की नहीं है , वो धीरे से बाहर भाग गया. कुछ देर बाद मैं भी निकल आई. दोस्तों, हम दोनों प्यार के पंछी अगर एक साथ निकलते तो पकड़े जा सकते थे. कुछ देर बाद इंटरवल खतम हो गया. हमारे मैथ के सर आने गए. अब हमारी मैथ्स की पढाई होने लगी. दुर्जोय क्लास में मेरे बगल ही बैठता था. उसने धीरे से मुझको एक पर्ची लिखकर दी.

चुदाई की क्लास कैसी लगी?? उसने पर्ची में लिखकर पूछा

बहुत मस्त लगी! मैंने उसको जवाब दिया.

उसके बाद दोस्तों, मैं दुर्जोय से पट गयी और गर्ल टोइलेट में हमने कई बार छिपकर चुदाई की पाठशाला जमाई और कई बार चुदाई की क्लास लगायी. दोस्तों, आपको मेरी ये ऐस्यासी की कहानी कैसे लगी, जरुर कमेन्ट करके बताये.

अपनी टीचर हेमा मैडम को चोद के उनकी गोद भरी

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दोंस्तों, मै कुनाल आपको अपनी कहानी अपनी जुबानी सुना रहा हूँ। ये मेरी पहली कहानी है नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर, मैं उन दिनों 12वी में पढ़ता था। मैं बलिया में पढ़ा करता था। मेरी क्लास वैसे तो बड़ी बोरिंग थी। पर पढाई बड़ी अच्छी होती थी। सुबह सबसे पहले तो गायत्री मंत्र होता था, फिर प्रार्थना होती थी। बड़ी टाइट पढाई होती थी। सब के सब जेंट्स टीचर थे। दोंस्तों सारे लड़के और लड़कियां सुबह से शाम तक बस पढाई की ही बात करते थे। इस तरह हम लोग बड़ी सूनी सूनी जिंदगी जी रहे थे।

फिर कुछ दिनों बाद हमारे कंप्यूटर टीचर को कहीं पक्की सरकारी नौकरी मिल गयी। उनकी जगह एक नयी हेमा मिस हम 12वी वालों को कंप्यूटर पढ़ाने आयी। दोंस्तों, क्या गजब की सामान थी। हमेशा शिफॉन या नेट की पारदर्शी साड़ी पहनती थी स्लीवलेस ब्लॉउज़ के साथ। दोंस्तों मुझे लगता है कि अपनी हेमा मैडम पर मैं सबसे ज्यादा आसक्त था। उनको देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। मैं अपने काबू से बाहर हो जाता था। उनके ब्लॉउज़ आगे और पीछे से बड़े गहरे होते थे। बस यही मन करता था कि कहीं हेमा मैडम अकेले में मिल जाए तो इनको कस के चोद लो।

मेरी 12वी क्लास के कुछ लड़के तो उनके पीछे पागल थे ही, पर सायद मैं ही सबसे ज्यादा पागल था। पहली बार उनको देखने पर ही घर आते ही मैंने अपना कमरे का दरवज्जा बन्द करके आँख बंद कर ली थी और मैडम का ध्यान लगाकर मुठ मार ली थी। दोंस्तों, इस तरह मैं दिन रात बस हेमा मैडम के बारे में सोचने लगा। मैं पूरी तरह से उनके लिए पागल हो गया था। हर दिन मेरा आकर्षण उनके लिए बढ़ने लगा।

यारों एक दिन मैं अपने स्कूल की गर्ल्स टॉयलेट में छिप गया और हर लड़की को मूतते देखने लगा। पर बसकिस्मती से एक दिन मैं पकड़ गया। मुझे प्रिन्सिपल के सामने पेश किया गया। जिस लड़की को मैं छुल छुल नँगी मूतते देखा था उसने मेरे प्रिन्सिपल से लिखित शिकायत कर दी। मेरी माँ को स्कुल में बुलाया गया।
बहनजी!! आपका लड़का बुरी संगत में पड़ गया है। क्लास की लड़कियों को टॉयलेट में छिप छिप कर देखता है। हमें इसका नाम काटना पड़ेगा! वरना इसकी वजह से हमारे स्कूल की बड़ी बदनामी हो जाएगी! प्रिन्सिपल नेे मेरी माँ से कहा

मेरी माँ तो रोने लगी। वो हाथ जोड़कर मुझे स्कूल से ना निकालने की बात करने लगी। मैं तो अपने काम पर बड़ा शर्मिंदा था। तभी वहां हेमा मैडम आ गयी और मुझे बचा लिया।
सर, बच्चे तो किशोर अवस्था में ऐसा करते ही है क्योंकि उनके शरीर में हार्मोन बनते है। आगे से कुनाल ऐसा नही करेगा!! हेमा मैडम ने प्रिन्सिपल से कहा और उस दिन मुझे बचा लिया। अब तो मैं उनका और भक्त हो गया। अब दिन रात मैं उनको याद करके सड़का मार देता। एक दिन मेरी माँ ने हेमा मिस से फोन पर बात की।

उनको 5 हजार हर महीने ऑफर किये और हेमा मिस मुझे ट्यूशन देने घर आने लगी। दोंस्तों, अब तो मेरी पांचो ऊँगली घी में आ गयी। जिस जवान मदमस्त औरत को मैं सोच सोच के सड़का मारा करता था, आज वो हसींन औरत मेरे बिलकुल पास कुछ इंच की दुरी पर बैठी पढ़ा रही थी। एक हफ्ता तो मैं यक़ीन ही नही कर पा रहा था कि ये सच है कि सपना है। हेमा मैडम के आने से पहले मैं साबुन से अपना चेहरा खूब चमकाता था जिससे मैं हैंडसम लगूँ।

एक दिन मेरा हाथ उनके हाथ से छू गया। बड़ा गर्म था।
मैडम!! क्या आपको बुखार है?? मैंने पूछा
नही कुनाल! औरत का बदन इतना गर्म होता ही है!! मैडम।बोली।
फिर एक दिन मैंने उनको अकेले में पाकर उनका हाथ पकड़ लिया। आज भी मैडम ने शिफॉन की पीली साड़ी पहनी हुई थी। आगे और पीछे से उनका ब्लॉउज़ काफी गहरा था। उनका सोने का मंगलसूत्र उनके क्लीवेज के बीचों बीच फसा था। हल्के पीले पारदर्शी ब्लॉउज़ के अंदर से कसे और तरासे चुच्चे बाहर झाँक रहे थे। पंखा चलने से मैडम का आँचल बीच बीच में उड़ जाता था तो उनकी गोरी चिकनी कमर , उनका सपाट पतला पेट और उनकी बेहद मादक मदमस्त कर देनी वाली नाभि दिख जाती थी। दोंस्तों, भगवान कसम खा के कहता हूँ की बस यही मन करता था कि इनको एक बार गिरा के चोद लूँ, फिर चाहे जेल ही ना हो जाए।

बस दोंस्तों इसी कश्मकश में मैंने मैडम का हाथ पकड़ लिया।
ये क्या है कुनाल?? हेमा मैडम ने पूछा
मैडम आप मुझे बहुत अच्छी लगती है। मैं आपसे शादी करना चाहता हूँ!! मैंने कहा
अगले ही पल मुझे एक तेज तमाचा अपने गाल पर मिला। मैडम बिना कुछ कहे घर चली गयी। उस रात मैं जान गया कि हेमा मैडम अब मुझे कभी पढ़ाने नही आएंगी। वो अगले 7 दिन जब मेरे घर पर पढ़ाने नही आयी तो मेरी माँ ने उनको फ़ोन किया। हेमा मिस ने कहा कि मैं उनके घर जाकर पढ़ लूँ।

डरते डरते मैं अगले दिन शाम 5 बजे उनके घर गया। दरवाजा खुला था। मैं अंदर गया। हेमा मैडम ने आज भी क्रीम कलर की शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी। दोंस्तों बिलकुल परी लग रही थी। आज भी वही स्लीवलेस ब्लॉउज़ था और आगे गहरा गला। पीठ तो समझिए बिलकुल नँगी थी। क्या तराशे हुए चुच्चे थे जो उनके ब्लॉउज़ ने बाहर की ओर झाँक रहे थे। एक बार फिर से मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। पर मैंने खुद को कंट्रोल कर लिया। मैं मैडम से डरने लगा था।

कुछ देर बाद मैडम ने खुद ही मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं थर थर कापने लगा।
डरो मत कुनाल!! आओ मेरे पास आओ!! उन्होंने मुझे अपने बच्चे की तरह सीने से लगा लिया। मैं हैरान था। मैं तो उनको चोदना चाहता था फिर ये मुझे अपना बच्चा क्यों मान रही है?? मै सोचने लगा।
देखो कुनाल!! डरो मत! जो तुम अपने घर पर करना चाहते थे, यहाँ कर सकते हो?? हेमा मैडम बोली।

दोंस्तों, मुझे तो विस्वास ही नही हो रहा था। खुद मैडम ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने सीने पर रख दिया। बड़ा गरम सीना था दोंस्तों। फिर हेमा मैडम से अपना आँचल सीने से हटा दिया। तिकोने दुधभरे समोसे मुझे दिखने लगा। मैंने बड़ी हिम्मत करके हेमा मैडम की ओर मुँह कर लिया। वो मुझे अर्थपूर्ण नजरों से देख रही थी। बड़ी मुश्किल से मैंने अपने से 10 15 साल बड़ी औरत हेमा मैडम से नजरे मिलायी। वो आँखों ही आँखों में मुझे चोदे जा रही थी। तो मैं भी आँखों ही आँखों में उनको चोदने लगा।

कब मैंने उनको अपने गले लगा लिया याद नही। हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगा लिया था। सायद ये दिन मेरी जिंदगी का सबसे सुंदर व यादगार दिन था। हम दोनों अपनी जिस्मानी जरूरत को पूरा करना चाहते थे। एक दूसरे को हमने भींच लिया था। सायद मैडम कई दिनों से नही चुदी होंगी, तभी मुझको मौका दे रही थी। उनके हस्बैंड भी पटना में बी.टेक वालों को किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे। हर 15 दिन में बलिया आते थे मैडम को चोदने के लिए।

सायद मैडम अभी 25 26 की होंगी, कड़क मॉल थी, जादा जवान थी, जादा चुदवाना चाहती थी, इसलिये मुझे ये गोल्डन चांस दिया था। दोंस्तों, मैंने तो यही निष्कर्ष निकाला। मैं मैडम को गले, मुँह, होंठ, सब जगह जल्दी जल्दी किस करने लगा। मैडम पूरा सहयोग कर रही थी। मेरा आत्मविस्वास बढ़ गया। मैंने मैडम को उनके होंठों पर चूमने लगा। ओहः कितनी अलग उनकी सांसों की गंध थी। मेरे नाक में बस गयी। मैंने मैडम के जुड़े की क्लिप को खोल दिया। सिल्की काले बाल बिखर गए। मैं उनके यौवन का प्यासा हो गया।

अभूतपूर्व सौंदर्य!! बॉप रे!! ऐसी सुंदरता, ऐसी मादकता, महकता छरहरा बदन, जरा भी कहीं चर्बी नही, मैंने हेमा मैडम को सीने से लगा लिया। उनके होंठों का दीदार किया और अपने होंठों को उनके होंठों से 1 2 3 बार टकराया फिर उनके होंठ पिने लगा। मैडम भी सोच रही होंगी की क्या मस्त भंवरा मिला है जो उनकी ओस की एक एक बूंद पूरी तन्मयता से पी रहा है। यारो, मैं जीवन में ये दृश्य कभी नही भूलूंगा। मैं उनके होंठ अपने मुँह से भर भरके पिने लगा। हम दोनों ही गरम हो गए थे।

मैडम! ऐसे मजा नही आ रहा!! साड़ी निकालिये!! मैंने कहा
मैडम ने मेरे सामने ही अपनी साड़ी निकाल दी। मेरा तो कालेज ही चिर गया। एक नई युवा सुंदरी मुझे अपने यौवन का रस पिला रही थी। मैडम पास आई तो मैं काँप गया। दौड़कर गया और बाहर का दरवाजा बंद कर आया। जिस कमरे में हम थे, वो भी कायदे से बन्द कर लिया। मैं नही चाहता था कि किसी को हवा भी इसके बारे में लगे।

मैं फिर से बेहद जोश में भड़कर उनको चूमने चाटने लगा। हम दोनों सोफे पर आ गए। मैडम सोफे पर बैठ गयी और पीछे टेक लगाकर लेट सी गयी। मैं उनको जगह जगह चूमने चाटने लगा। मेरे हाथ उनके तराशे हुए चुच्चों पर जाने लगे। बॉप रे!! कहीं मैं उनके यौवन से मर ना जाऊ। मैंने सोचा। मैंने मैडम के ब्लॉउज़ के बटन खोल दिए। उसे निकाल दिया। सफ़ेद रंग की ब्रा में थी। मैंने अब उनको सोफे पर लिटा दिया क्योंकि बैठ के उनके मम्मे पीना नामुमकिन था। हेमा मैडम को सोफे पर लिटा था, मैंने उनकी सफ़ेद ब्रा को आगे से ऊपर हल्का सा उचकाया और दुधभरे तिकोने समोसे उभर आये।

बिना कोई देर किये मैंने समोसे को मुँह में भर लिया और पिने लगा। उफ्फ्फ !! कितना मीठा स्वाद था। ताजा नर्म गोश, मुलायम मलाई सा मांस का टुकड़ा जैसे चिकेन टिक्का या मलाई टिक्का। जी किया कि दांत से काटकर अलग कर दूँ। फिर हेमा मैडम का दूसरा मम्मा भी पिया। मैडम ने तब तक खुद ही अपनी पतली चिकनी पीठ में हाथ डालकर ब्रा के हुक खोल दिए। मैं आराम से उनकी छातियां पीने लगा। एक हाथ से पीता तो दूसरे हाथ से मम्मे दबाता और सहलाता।

इसी दौरान हम दोनों बहुत चुदासे हो गये। मैडम के पेटीकोट का नारा मैं खोल दिया और निकाल दिया। भले ही वो 32 34 की थी पर आज भी किसी छमिया से कम नही लगती थी। मेरी स्कूल की जवान जवान लड़किया भी उनके आगे फेल थी। मैडम के खूब चिकने तराशे संगमरमरी पैरों को तो मैं देखता ही रह गया। बॉप रे!! बिलकुल दूध की तरह सफ़ेद। मैंने पेटीकोट निकाल दिया। पैंटी भी निकाल दी। मैडम की चूत पर हाथ फेरा तो झांटों के बाल गढ़ने लगे। असल में उन्होंने कुछ दिन पहले ही झांटे बनायीं थी, इसलिए हल्की हल्की खूटी दार झांटे निकल आयी थी।

मैं बार बार उनकी चूत पर हाथ फिराने लगा और खूंटीदार झांटों को सहला सहलाकर मजा लेने लगा। फिर मैं उनकी बुर पीने लगा। बुर फ़टी थी। सायद उनके हस्बैंड ने उनको चोदा होगा। मैं तन्मयता और सच्ची लगन से उनकी बुर पीने लगा। अपनी जीभ को गोल गोल घुमाकर हेमा मैडम की चूत पीने लगा। फिर वो पूरी तरह से गर्म हो गयी। मैंने कपड़े उतारे और लण्ड को उनके बुर में सरका दिया। लण्ड आराम से उनकी बुर में दाखिल हो गया। मैं अपनी मैडम को चोदने लगा।

मैं इससे पहले कई लड़कियों को पेल चूका था। अब अपने से उम्र में बड़ी औरत को चोदने में अलग सुख ही मिलता है। आपको फीलिंग आती है कि आप बड़ी औरतों को भी अच्छे से ले पाते है, उनको भी हैंडल कर सकते है। अपनी हेमा मैडम को यूँ उनके ही घर में नन्गा करके सोफे पर चोदने का सुख ही अभूतपूर्व था। उनके रूप की तिजोरी मेरे सामने खुली हुई थी। मैं उन्हें हुस्न का सारा खजाना, सारा सोना लूट रहा था। मेरी जिंदगी का ये एक यादगार दिन था। मेरा लण्ड अच्छा खासा मोटा 7 8 इंच का था। मैं गपागप मैडम को पेले जा रहा था। मैडम ने मुझसे नजरे नही मिलायी। आँखे बंद कर ली थी। सायद शर्म कर रही थी। ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है

फिर वो घडी आयी जब मैं उनकी योनि में ही झड़ गया। जैसे ही मैंने लण्ड निकाला , कुछ माल तो अंदर चला गया, कुछ तुरंत बाहर आ गया। मैडम से अपनी पैंटी से अपनी बुर साफ कर ली। उफ्फ्फ!! क्या मलाईदार बुर थी उनकी। मैडम अब सोफे पर उठ बैठी और मेरा लण्ड चूसने लगी। मैंने भी खूब चुस्वाया। कुछ देर बाद मेरा फिर से खड़ा हो गया। मैंने मैडम को सोफे पर पेट के बल लिटा दिया। उनकी कमर के नीचे 2 4 मुलायम तकिए भर दिए। हेमा मैडम का पिछवाड़ा उभर के मेरे सामने आ गया। मैंने तो पहले उनके दोनों मुलायम रबर की गेंद से चुत्तड़ो से खूब खेला। मैंने उनकी गाण्ड भी चाटी। फिर मैंने लण्ड को उनकी बुर की फाकों में फिर से पेल दिया।

पीछे से उनके गोल गोल भरे हुए पूट्ठों के बीचों बीच हेमा मैडम की बुर कुछ जादा ही सुंदर लग रही थी। दोंस्तों इस तरह पीछे से लेने में कसावट भी जादा आ जाती है। मैं उनकी चिकनी पीठ को सहलाते हुए उनको चोदने लगा। काफी बढ़िया अनुभव था। फिर धीरे धीरे मेरे लण्ड ने रफ्तार पकड़ ली। मैंने मैडम के दोनों चूड़ी भरे हाथ पकड़ लिए और घोडा गाडी चलाने लगा। उनके हाथ की, उनके सुहाग की कई चूड़िया टूट गयी। उफ्फ्फ!! पीछे से अपनी मैडम को चोदने में मुझे खूब कसावट मिली।

लगा किसी नई लौण्डिया को चोद रहा हूँ। आधे घण्टे की मेहनत के बाद मैंने माल उनकी बुर में ही छोड़ दिया। अपने से बड़ी टीचर होने के नाते मैंने उनका सम्मान रखा। उनकी गाण्ड नही मारी। कुछ दिन बाद उन्होंने मुझे बताया की वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है। उन्होंने अपने हस्बैंड को मेरे बारे में कुछ नही बताया। उससे कहा कि ये बच्चा उसका ही है।

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