पति के भाइयों ने मुझे खाने देने के बदले बेरहमी से चोदा

हेल्लो दोस्तों, मैं माला चौधरी आप सभी का नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

मैं बलिया जिले की रहने वाली हूँ। मैं मेहनत मजदूरी करती हूँ। मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रही हूँ, वो बहुत दर्दनाक है। मैं अपने पति और बच्चों के साथ ईट भट्टे पर ईट बनाने का काम करती थी। मैं जवान और खूबसूरत औरत थी। मैं पति और बच्चों के साथ बहुत जादा मेहनत करती थी। आप लोग तो जानते ही होंगे की ये कितना जादा मेहनत वाला काम है। सबसे पहले हम मिटटी को जमीन से खोदते, उसको तोड़कर पावडर बनाकर उसे एक चलनी से छानते थे क्यूंकि अगर मिट्टी में कोई घास रह गयी तो ईट नही बन पाती। उसे छानने के बाद हम उसे पानी डालकर अच्छी तरह से घूथते थे, फिर सांचे में डालकर ईट बनाते थे। उसके बाद उसे सुखाया जाता था। हम भट्टा मजदूरों का काम यहीं पर खत्म नही होता था।

हमें सूखे हुए ईटों को भट्टे में ले जाकर बड़ी धीरे से रखना पड़ता था, फिर सारा भट्टा भर जाने के बाद उसके बीच कोयला जलाकर उपर से राख से बंद कर दिया जाता था, एक रात में ईंट पक जाता था। तो दोस्तों आप जान गये की ये काम कितना मेहनत वाला था। मैं सूरज उगने से ढलने तक कमर तोड़ मेहनत करती थी, पर मेरे पति के भाई रज्जू और जगराम मेरे पति से बहुत जलते थे। वो १ हफ्ता काम करते थे तो दूसरे हफ्ते आराम करते थे। पर मैं अपने पति से साथ बिना कोई छुट्टी लिए पूरा महिना काम करती थी। हम लोग बहुत गरीब थे और भट्टे के पास की जमीन में ही टीन का छोटा सा मकान बनाकर रहते थे। मेरे साथ में कोई १०० मजबूर ऐसे ही ईंट भट्टे के पास ही टीन के छोटे छोटे झोपड़े बनाकर रहते थे। इसी दौरान मेरे पति ने मेहनत करके एक नई मोटर साईकिल खरीद ली। पति के भाई रज्जू और जगराम तो अब मुझसे और भी जादा जलने लगे। एक दिन भट्टा मालिक से रात में मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने दफ्तर में खीच लिया और मेरे साथ जोर जबरदस्ती करने लगा। उसने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया और मेरे होठ पीने लगा। मैं “बचाओ…बचाओ….” चिल्लाने लगी।

मेरे पति किसी काम से बाहर गये थे। भट्टा मालिक मुझे चोदना चाहता था, क्यूंकि मैं बहुत सुंदर, सेक्सी और जवान थी और इस समय मैं सिर्फ २५ साल की थी।

“माला….मैं सारे मजदूरों को ३०० रुपया देहाड़ी देता हूँ। तू अगर एक बार मुझे अपनी चूत दे दे तो मैं तेरी देहाड़ी ५०० कर दूँगा!” भट्टा मालिक हँसते हुए बोला

“लानत है ऐसे पैसे पर..” मैंने कहा और उसके चेहरे पर थूक दिया और बचाओ बचाओ….मैं चिल्लाने लगी। मेरे पति आ गए और उन्होंने मुझे आकर बचा लिया। भट्टा मालिक शराब के नशे में था। मेरे पति से उसे लात मूकों से खूब मारा। पर उस दिन के बाद से ये बात साफ हो गयी थी की मेरा भट्टा मालिक मेरे लिए गंदी नजरे रखता है और मुझे चोदना चाहता है। उधर मेरे पति के भाई रज्जू और जगराम भी मुझसे जलते थे। क्यूंकि मैं कभी भी अपने पति को उनके साथ नही बैठने देती थी। मुझे डर था की कहीं वो भी नशा करना ना सीख जाए।

कुछ दिनों बाद एक बड़ी त्रासदी हो गयी। भट्टे में कोयला भरने के बाद जलाया जा रहा था और गर्म कोयले की लपटों से मेरे पति उसी में गिर गए और कुछ ही देर में जलकर उनकी मौत हो गयी। ये मेरे लिए एक बड़ी बुरी खबर थी। मैं एक महीना सदमे में रही। मेरे २ बच्चे ही थे, एक लड़का और एक लड़की। उधर मेरे पति के भाइयों ने कपट करके मेरे पति के बैंक अकाउंट में से सारा पैसा निकाल लिया। थक हार कर मुझे रज्जू और जगराम के सामने झुकना पडा। रज्जू मुझसे छोटा था, रिश्ते में मेरा देवर लगता था और जगराम मुझसे उम्र में बड़ा था इस तरह वो रिश्ते में मेरे जेठ लगता था।

“अब मेरे पति के जाने के बाद तुम लोग मुझे २ वक़्त की रोटी दो!!” मैंने कहा

वो दोनों हँसने लगे। शुरू से ही वो दोनों मुझ पर बुरी नजर रखते थे और मेरी जैसी मस्त माल को कसकर चोदना चाहते थे। मैं उन दोनों की बुरी नजरो से अच्छी तरह वाकिफ थी।

“भाभी हम तुझे रोटी भी देंगे और रहने के लिए कमरा भी देंगे पर रात में तुझे हम दोनों के साथ वही करना होगा तो हमारे भाई के साथ करती थी!” रज्जू और जगराम एक साथ बोले। मैं ये बात समझ गयी थी की वो मुझे रात में चोदना चाहते है। मैं बहुत नाराज हो गयी।

“तुम हरामियों से चुदवाने से तो अच्छा है की मैं अपने बच्चो के साथ भूखे मर जाऊं!!” मैंने आँख दिखाते हुए कहा और उन कमीनो के सामने हथियार डालने से मना कर दिया। पर दोस्तों, मेरे पास जितने पैसे थे २ ३ महीनो में सब खत्म हो गये। इसी बीच मेरे बच्चों की तबियत बिगड़ गयी और मैं समझ गयी की ऐसे काम नही चलेगा। अपने २ छोटे छोटे मासूम बच्चों के लिए मैं रज्जू और जगराम से सामने झुकने को तैयार हो गयी।

“ठीक है, मुझे मंजूर है। जो काम रात में मैं तुम्हारे भाई के साथ करती थी, वो तुम दोनों के साथ करुँगी, पर तुम दोनों को मेरे बच्चो की परवरिश करनी होगी” मैंने कहा। वो दोनों कमीने तो ये सपना कबसे देख रहे थे। मैं अपने बच्चों को लेकर रज्जू और जगराम वाले टीन के घर में आ गयी। आखिर वो रात आ गयी जो मैं कभी नही आना चाहती थी। सुबह से मैं ईट बनाने का काम कर रही थी, रज्जू और जगराम भी दूसरी तरह काम कर रहे थे। मेरे शरीर पर अब भी मिटटी का पाउडर हर जगह लगा हुआ था जबकि रज्जू और जगराम नहा चुके थे। मैं सभी के लिए खाना बना दिया। रात के १० बज गये। भीतर के कमरे में रज्जू और जगराम मेरी चूत मारने के सपना देख रहे थे। वो दोनों अपने अपने कपड़े उतार चुके थे और अपने अपने मोटे लौड़े पर सरसों का तेल मल रहे थे। मैं भीतर गयी।

“भाभी तुम्हारे जिस्म पर मिट्टी बहुत लगी है, इसलिए साबुन से मल मल कर नहा लो, फिर मेरे पास आओ” रज्जू बोला इसलिए मैं नहाने चली गयी। मैं साबुन से मल मलकर खूब अच्छी तरह से नहा लिया, मैंने ब्लाउस और पेटीकोट पहन लिया। मैं भीतर कमरे में चली गयी। मैं बिलकुल रानी जैसी लग रही थी। मैंने साड़ी नही पहनी थी क्यूंकि अभी मुझे इन भेड़ियों से चुदवाना जो था।

“वाह भाभी !! आज तो तुम बिलकुल माल लग रही हो!!” रज्जू बोला

वो बार बार सिर से पाँव तक मुझे ताड़ रहा था, हरे ब्लाउस में मेरे चुस्त ३६”के मम्मे उसे लुभा रहे थे। उन कमीनो से मुझे अपने पास बिस्तर में लिटा लिया और मुझे छूने लगे। मैंने अपने दिल पर पत्थर रखकर खुद को उन भेड़ियों के हवाले कर दिया। मुझे उन दोनों ने बीच में लिटा दिया और रज्जू और जगराम मेरे बगल बगल हो लिए। दोनों मेरे गाल चूमने लगे। सुबह से ही मैं ईट बनाने का काम कर रही थी, इसलिए थकान से मेरा बदन टूट रहा था। पर मेरे स्वर्गीय पति के दोनों भाई आज मुझे चोद चोदकर मेरी थकान दूर करने वाले थे। दोनों मेरे गाल चूमने लगे। मैं बिलकुल अभी अभी नहाकर आई थी इसलिए मेरा बदन हल्का भीगा था और चंदन वाले साबुन की खुसबू मेरे गोरे जिस्म से अभी आ रही थी।

फिर रज्जू और जगराम बारी से मेरे रसीले होठ चूसने लगे और ऐश करने लगे। रज्जू ने मेरे ब्लाउस की ३ बटन खोल दी, फिर जगराम से मेरे ब्लाउस की बाकी की २ बटन खोल दी। उन दोनों भेडियों से मेरा ब्लाउस निकाल दिया और मैं उपर से नंगी हो गयी। आज २५ में पहली बार मैं दो दो गैर मर्दों से चुदने जा रही थी। अगर मेरे पति जिन्दा होते तो शायद मुझे कभी इन भेड़ियों से नही चुदवाना पड़ता। रज्जू मेरे बाए हाथ पर लेता था। उसने मेरे  बाए मम्मे को हाथ में ले लिया और दबाने लगा। वहीँ रिश्ते में लगने वाला मेरा जेठ मेरी दाई तरह लेता था, इसलिए उसने मेरा दांया दूध हाथ में ले लिया और जोर जोर से दबाने लगा। मैं“……उई..उई..उई…. माँ….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ…. .अहह्ह्ह्हह..” करके चिल्लाने लगी। ये तो अच्छा था की मेरे बच्चे अभी छोटे थे वरना आज वो भी जान जाते की २ वक़्त की रोटी के बदले मुझे इन भेड़ियों से चुदवाना पड़ रहा है।

मेरे स्वर्गीय पति के दोनों भाई रज्जू और जगराम मेरे मस्त मस्त ३६” के दूध पूरा मजा लेकर हाथ से दबा रहे थे। मैं चीख रही थी। फिर दोनों मेरे दूध को अपने मुंह में लेकर पीने लगे और मजा मारने लगे। मैं कुछ नही कर सकती थी। हर हालत में मुझे आज इन दरिंदो से कसकर चुदवाना ही था। वक़्त ने मुझे मजबूर कर दिया था। मेरी बड़ी ही मुलायम गोल गोल सुडौल छातियों को दोनों नामुराद इस तरह से पीने लगे जैसे मैं उन दोनों की बीबी हूँ। रज्जू तो मेरे बूब्स पर काट लेता था।“….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करके मैं सिसक रही थी।

फिर जगराम ने मेरे पेटीकोट का नारा खोल दिया और निकाल दिया। मैं अंदर से नंगी थी, क्यूंकि हम मजदूर कहाँ इतना पैसा कमा पाते है की महंगी महंगी चड्डी खरीद पाए। मेरी चूत बिलकुल साफ थी, क्यूंकि मुझे झांटे बिलकुल पसंद नही थी। मैं इनको हमेशा साफ रखना पसंद करती थी। रज्जू मेरी चूत पर आ गया और उसने मेरे दोनों पैर खोल दिए। जबकि जगराम अभी भी मेरे दूध पीने में मस्त था।

“ओ भाभी, तुम कितनी मस्त माल हो! तुमको चोदने में जरुर मजा आएगा” जगराम बोला। वो मेरे दूध पीने में बिसी था। जबकि मेरा देवर रज्जू अब मेरी चूत पी रहा था। दोनों मेरे जिस्म को आज जी भरकर नोच लेना चाहते थे, मैं ये बात जानती थी। रज्जू अपनी जीभ और होठ से मेरी चूत पी रहा था। चूत की घाटी में चूत के होठो को वो बड़ी मेहनत से चाट रहा था। धीरे धीरे मुझे भी ये सब अच्छा लगने लगा था।

“….हाईईईईई, उउउहह, आआअहह.. …अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” मैं चिल्ला रही थी। पर रज्जू टी जैसे आज मेरा भोसड़ा देखकर बिलकुल पगला ही गया था।

“ओह्ह भाभी, तुम्हारे जैसी हसीन औरत मैंने आजतक नही देखी” रज्जू बार बार कह रहा था और मेरी बुर को बड़ी मेहनत से चाट रहा था। मैंने उसपे सर पर अपना हाथ रख दिया था और दोनों टांगे मैंने फैला ली थी।

दूसरी तरह जगराम (रिश्ते में मेरा जेठ) मेरे मम्मे चूसने में डूबा हुआ था। उसके चूसने से मेरे शरीर में अजीब से तरंगे दौड़ रही थी। मुझे सेक्स का नशा चढ़ने लगा था। अब मुझे भी ये सब बहुत अच्छा लग रहा था। इसी बीच रज्जू ने अपना पूरा हाथ ही मेरी चूत में डाल दिया। मेरी तो जैसे गांड ही फट गयी। उस नामुराद ने अपने हाथ की मुठ्टी ही मेरे भोसड़े में डाल दी। और अंदर बाहर करने लगा। मेरी तो जैसे जान ही निकल रही थी। बड़ी देर तक मेरा देवर रज्जू मेरी चूत में मुट्ठी डालकर अंदर बाहर करता रहा। मेरी चूत उसके हाथ डाल देने से फैलकर बहुत बड़ी हो गयी थी। रज्जू ने मेरे जिस्म से साथ जी भरकर १ घंटे तक खिलवाड़ किया। फिर उसने अपना ८” का मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और ताड़ से अंदर धक्का मारा। उनका बांस जैसा ८ इंची लंड मेरे भोसड़े में अंदर गच्च से उतर गया और वो मुझे चोदने लगा।

मैं किसी रंडी छिनाल की तरह अपने दोनों पैर हवा में उठा दिए और कसकर चुदवाने लगी। रज्जू मुझे बेदर्दी से हुमक हुमककर चोदने लगा।“उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. हा हा हा.. ओ हो हो….” करके मैं तेज तेज चिल्ला रही थी। पर शायद मेरी नशीली आवाजे सुनकर रज्जू को कुछ जादा ही जोश चढ़ रहा था। वो मुझे तेज तेज ठोकने लगा। बाप रे बाप! उसका लौड़ा बहुत मोटा था, मैं अपनी चूत में उसका मोटा लौड़ा महसूस कर सकती थी। लग रहा था की किसी ने कोई बल्ली ही मेरी चूत में उतार दी है। रज्जू के ताबड़तोड़ धक्को से मेरी बुर फटी जा रही थी। मैं चिल्ला रही थी, चुदवा रही थी। लग रहा था उस बहनचोद का लंड मेरी चूत मारते मारते मेरे पेट तक आ जाएगा। इधर मेरे स्वर्गवासी पति का दूसरा चुदासा भाई जगराम अपने हाथ की उँगलियों से मेरे मस्त मस्त मम्मो की निपल्स को मसल रहा था।

मैं इस समय डबल उतेज्जना और सेक्स का नशा महसूस कर रही थी। जगराम मेरे होठ भी चूस रहा था। मैं तडप रही थी। रज्जू तेज तेज मेरी चूत में शानदार धक्के मारने लगा। कुछ देर में उसका लौड़ा मेरी चूत में फिट हो गया और मुझे आराम से चोदने लगा। कुछ देर बाद रज्जू ने मेरी चूत में ही माल गिरा दिया। अब जगराम मेरी चूत पर आ गया और मेरी चूत पीने लगा। रज्जू मुझे लेते लेते काफी थक गया था इसलिए वो मेरे बाए हाथ पर आकर लेट गया था। कुछ देर तक मेरी चूत पीने के बाद जगराम ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगा। एक बार फिर से मेरी इज्जत लुटने लगी। मैं सोचने लगी की काश आज अगर मेरे पति जिन्दा होते तो मुझे इन दरिंदो से नही चुदवाना पड़ता। जगराम का लंड ७ इंच का था, पर काफी मोटा था।

एक बार फिर से मैंने अपने दोनों पैर हवा में उठा लिए और चुदवाने लगी। कुछ देर में जगराम से अपनी रफ्तार पकड़ ली और तेज तेज मुझे ठोकने लगा। मुझे भी अच्छा लग रहा था इसलिए मैं “…..अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्……उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह…..चोदोदोदो…..मुझे और कसकर चोदोदो दो दो दो” कहने लगी और जगराम से चुदवाने लगी। जगराम ये देखकर बहुत खुश था की मैं उसका पूरा सहयोग कर रही हूँ। वो मेरे उपर लेट गया और मेरे मस्त मस्त मम्मे पीने लगा और मुझे बड़ी शान से ठोकने लगा। ३५ मिनट बाद वो भी मेरी बुर में ही ओउट हो गया। मुझे बड़ा मजा मिल रहा था दोस्तों। आज मेरे पति जिन्दा नही थे, पर आज उनके भाइयों ने मुझे चोदकर आज उनकी कमी पूरी कर दी थी। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।

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