मेरे वफादार गार्ड्स ने चूत में ऊँगली डालकर की चुदाई

Security Guard Sex Story : सभी लंड वाले मर्दों के मोटे लंड पर किस करते हुए और सभी खूबसूरत जवान चूत वाली रानियों की चूत को चाटते हुए सभी का मैं स्वागत करती हूँ। अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी मित्रो तक रही हूँ। ये मेरी पहली स्टोरी है। इसे पढकर आप लोगो को मजा जरुर आएगा, ये गांरटी से कहूंगी।

मेरा नाम निक्की सिंह है। मै पंजाब की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 37 साल है। मेरी जवानी आज भी बरकरार है। सारे मोहल्ले में मेरी जवानी के चर्चे हैं। मेरी खूबसूरती को देखकर सारे मर्द झड़ जाते हैं। मै जब भीं मोहल्ले से गुजरती हूँ सारे मोहल्ले वाले जहां के तहां खड़े होकर मेरे को ताड़ने लगते हैं। मेरी मटकती गांड को देखकर ही अपना लंड खड़ा कर लेते हैं। मै शादी शुदा औरत थी। मेरे हसबैंड एक बिज़नस मैन थे। वो अक्सर बाहर ही रहते थे। मेरे को घर का सारा काम संभालना पड़ रहा था। मेरा एक बेटा था। उसे भी मुम्बई के एक अच्छे से कॉलेज में एडमिशन कराके वही शिफ्ट कर दिया गया था। मैं अकेली ही घर पर रहती थी। मेरे अलावा मेरे घर पर दो गार्ड रहते थे। एक का नाम बिट्टू और दूसरे का नाम विक्रम था।

वो भी मेरे काम में हाथ बटाते थे। बिट्टू का शरीर बिल्कुल लोहे जैसा था। विक्रम भी कुछ कम नहीं था। वो भी जवान मर्द था। विक्रम की उम्र लगभग 30 साल की और बिट्टू की उम्र 28 साल की थी। वो दोनों मेरे को बहोत ही अच्छे लगते थे। दोनों एक से बढ़कर एक फौलादी शरीर वाले थे। दोनों के शरीर को देख कर चुदने का मन कर रहा था। वो दोनों हमेशा भाभी भाभी करते रहते थे। विक्रम तो शादी शुदा था। वो मेरी तरफ काम ही ध्यान देता था। लेकिन मन उसका भी करता था। बिट्टू तो मेरे को कभी कभी एक टक लगाए घूरता ही रहता था। दोनों कुछ कर नहीं रहे थे बस ताड़ते ही रहते थे। मैं अपनी चूत उन दोनों के हवाले करना चाहती थी।

एक दिन मैं बैठी धूप सेक रही थी। सर्दियों का मौसम था। काफी ठंड पड़ रही थी। बड़े दिनों के बाद धूप भी निकली था। मैंने उस दिन साडी पहनी हुई था। मेरे घर के ग्राऊंड में एक चारपाई पड़ी थी। मैं उसी पर लेटी हुई थी। वो दोनों मेरे को घूर कर देख रहे थे। मैंने अपना पैर उठाकर एक पैर पर रख ली। मेरी साड़ी जांघ तक आ गयी। विक्रम मेरी गोरी चिकनी टांगो को देखकर बहोत ही खुश हो रहा था। उसने बिट्टू को भी बुला लिया। वो दोनों मेरे टांग की तरफ खड़े होकर मेरी चूत को देखने की कोशिश करने लगे। मैं भी उन दोनों को मजा देने के लिए अपनी साड़ी धीरे धीरे ऊपर करने लगे। उन दोनों के लंड में हलचल मच गयी। कुछ देर बाद मैं उठ गयी। वो दोनों जल्दी से खिसक लिए। मैं विक्रम को पहले अपने पास बुलाई।

मै: विक्रम तुम दोनों किस बात को लेकर मेरी तरफ देख रहे थे??

विक्रम: कुछ नहीं भाभी हम दोनों तो वैसे ही बात कर कर के हंस रहे थे

विक्रम डर गया। वो हिचकिचा कर बोल रहा था। मैने कुछ देर बाद बिट्टू को बुलाया। उसने भी यही बात बोली।

मै: तुम दोनों मेरे को भाभी कहते हो। तो तुम मेरे देवर हुए. तुम जो भी मजाक करना चाहो कर लो

बिट्टू: भाभी हम लोग आप के बारे में ही बात कर रहे थे

बिट्टू ने मेरे को सारी बाते बता दी। वो मेरे से खुल के सब बता रहा था। मेरा मन भी चुदने का होने लगा। इतने में वो दोनो मेरी कुछ ज्यादा ही तारीफ किये जा रहे थे। मैं बहोत खुश हो रही थी।

विक्रम: भाभी आप भैया के बिना कैसे इतने दिन काट लेती हो??? मेरी बीबी तो एक ही दिन में बेकरार हो जाती है

मै: कैसे काटती हूँ एक एक पल वो मै जानती हूँ। मेरे को भी डोज़ चाहिए लेकिन कौन दे सकता है। तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर ही रहते है।

विक्रम: सही कहा भाभी आपने! बहोत तड़प होती है। मैं भी अभी तक कुवांरा हूँ मेरे को भी सेक्स करने का बहोत मन कर रहा है. मैं सोफे पर बैठी थी। मैं अचानक से उठने लगी। मेरी साडी पैर में फस गयी और मै बिट्टू के ऊपर गिरने लगी। उसने मेरे को थाम लिया। वो मेरी आँखो में आँखे डालकर बात कर रहा था। उसकी हवसी नजरे बता रही थी की वो मेरे को चोदना चाहता है।

बिट्टू: भाभी ऐसे न देखो मेरे को, मेरे अंदर हलचल मच जाती है

भाभी: ऐसी हलचल तो मेरे अंदर रोज मचती रहती है

बिट्टू: विक्रम का क्या है उसकी तो शादी हो चुकी है। उसकी बीवी भी उसी के साथ रहती है

विक्रम: एक ही सामान से रोज रोज खेलने पर जी भर जाता है। मेरा बीवी से जी भर गया है

मैं: चलो मैं तुम लोगों को एक नया सामान दिखाऊंगी। लेकिन उसके लिए तुम लोगों को शाम को रुकना होगा

वो दोनों नयी चूत के बारे में सुनते ही उछल पड़े। मैं भी उन दोनों के साथ अपनी कामना पूरी होने का इंतजार कर रही थीं। वो दोनो भी किसी तरह से शाम का इंतजार कर रहे थे। वह घडी आने ही वाली थी जब मैं उन दोनों से चुदने वाली थी। शाम हो चुकी थी। कामवाली ने आकर तीन लोगों का खाना बनाया। उसके बाद हम तीनो ने खाना खाकर बैठ कर कुछ रोमांचक बाते की। दोनों का चोदने का मूड बना था। मेरे बड़े बडे 34 के मम्मे को घूर रह थे। मैं जल्द ही उन दोनों के साथ अपने बेडरूम में आ गयी। मैंने उस दिन काले रंग की साड़ी पहन रखी थी। लिपस्टिक भी काली लगा रखी थी।

बिट्टू: भाभी काले रंग की साडी में आप कुछ ज्यादा ही हॉट लगती हो!

मै: कुत्तो!! मै तो हर दिन ऐसी ही लगती हूँ। तभी तुम दोनों मेरे को देखकर हमेशा लार टपकाते रहते हो!

विक्रम: सिर्फ लार टपकाने से क्या होता है। लेने को मिला ही नहीं

मैं: तुम लोगो ने आज तक मेरे को देखकर लार टपकाया है। आज मैं तुम्हे अपने बदन को चाटने का मौका दूँगी

बिट्टू: भाभी आप हमसे चुदवायेंगी??

मै: हाँ बिट्टू तुम्हारे भैया भी तो बाहर किसी की चूत पी रहे होंगे

मैने दोनों को अपने पास कर लिया। वो दोनों मेरे को ताड़ने लगे। मैंने अपने हाथों से साडी को पेट से हटाया। मेरे गोरे पेट पर गहरी चूत सी नाभि को देखते ही दोनो झपट पड़े। बिट्टू मेरी नाभि को चाट रहा था। मैं चुपचाप अपनी नाभि को पीने दे रही थी। उसने अपनी जीभ मेरी नाभि में घुसाकर मेरी सिसकारी निकलवा दी। मैं “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की सिसकारियां निकालने लगी। विक्रम भी कुत्ते की तरह मेरे बदन को अपनी जीभ लगाकर चाट रहा था। वो मेरी कमर को कस कर दबाये हुए पेट के किनारे किनारे चाट रहा था। दोनों ने मेरे को चाट चाट कर गरम कर दिया। बिट्टू नाभि को ही छेड़ कर खेलता रहा।

विक्रम ने मेरे गले को किस करते हुए मेरे गालो पर किस किया। वो कुछ देर तक तो मेरे होंठों की खूबसूरती को ताड़ता रहा। फिर उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पर टिका दिया। धीरे धीरे से मेरे होंठो को चूसने लगा। मै दोनों के सर पर एक एक हाथ रखे हुए उनके बालो को पकडे हुए थी। मैं जब भी उन दोनों के बालो को पकड़ कर खींचती थी वो दोनो मेरी नाभि और होंठ की चुसाई को तेज कर देते थे। दोनों के इस तरह से करने पर मेरी चूत में आग सी लग गई। विक्रम की जोरदार होंठ चुसाई से मेरे को सांस लेने तक की फुरसत नहीं मिल रही थी। मेरी सांस फूलने लगी। वो अपनी जीभ को मेरे मुह में डालकर मेरी जीभ से खेलने लगा। बिट्टू ने नाभि पीना बंद किया।

उसने एक एक करके मेरी ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया। मैंने अंदर काले रंग की ब्रा पैंटी पहनी थी। काली ब्रा में फसे हुए मेरे दोनों दूध की तरह बूब्स बहोत ही अच्छे लग रहे थे। बिट्टू ने अपने हल्के हाथों से मेरे बूब्स को दबाया।

बिट्टू: विक्रम भाई होंठ पीना बंद कर! भाभी के चुच्चे तो और भी ज्यादा मजेदार हैं

विक्रम: चल भाई आज भाभी के दूध को पीते हैं

मेरी ब्रा को विक्रम ने निकाल दिया। मेरे दोनों बूब्स आजाद होकर झूलने लगे। बिक्रम और बिट्टू दोनों में मेरे एक एक बूब्स को पकड़ कर पीने लगे। मक्खन की तरह मुलायम दोनों चुच्चो को पी कर वो दोनों मजा काट रहे थे।

मेरी तो जान निकल जाती थी जब वो दोनों मेरे निप्पल को अपने दांतो से पकड़कर खीचते थे। मै“……अई…अई….अई……अ ई….इसस् स्स्स्…….उ हह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की आवाजे निकाल कर अपने होंठो को काट रही थी। वो दोनो मेरी आवाज के धुन पर ही जैसे पी रहे थे। मै जितनी जल्दी आवाजे निकालती उतनी ही तेजी से वो दोनों मेरा दूध पी रहे थे। दोनों ने एक साथ सब करना शुरू किया। विक्रम और बिट्टू दोनों ही खड़े होकर अपना अपना पैंट खोलने लगे। दोनों का औजार बहोत ही बड़ा लग रहा था। मै बैठी हुई थी। वो दोनो मेरे सामने अपना अंडरवियर उतार रहे थे।

मेरे मुह के आमने सामने ही उन दोनो का लंड उपस्थित था। अंडरवियर के निकलते ही उन दोनों के साँड़ जैसा लंड दिखने लगा। वो दोनो अपने हाथो में लेकर हिला रहे थे। मै बहोत खुश हो रही थी। इतने दिनों की तड़प दो साँड़ जैसे लंड वाले इंसान मिटाने वाले थे। मैंने दोनो के लंड को हाथ में पकड़ा। विक्रम का लंड 7 इंच और बिट्टू का लंड लगभग 6 इंच का था। विक्रम का लंड काला और भयानक दिखता था। लेकिन बिट्टू का लंड गोरा और ज्यादा आकर्षक लग रहा था। मेरे छूते ही उन दोनों का लंड मोटा हो गया। दोनों का लंड मै एक साथ हिला रही थी। धीरे धीरे उनका ढीला खंभा टाइट होकर खड़ा हो गया। मेरे हाथ हटाते ही उनका लंड ऊपर नीचे होने लगा।

बिट्टू: भाभी मेरे लंड को चूसो!

मैंने उसके लंड को पकड़ा और अपने मुह में भर कर चूसने लगी। विक्रम अपने लंड पर मेरा हाथ रखा के मालिश करवा रहा था। मेरे को बहोत मजा आ रहा था।

विक्रम ने मेरी साडी निकाल दी। मैं सिर्फ पेटीकोट में हो गयी। मैंने खुद ही अपनी पेटीकोट का नाडा खोला और पैंटी में हो गयी। विक्रम मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से ही मसलने लगा। मै चुदने को तड़पने लगी। मेरी“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअ अ….आ हा …हा हा हा” की सिसकारियां बढ़ने लगी। दोनों ने पैंटी को पकड़कर निकाल दिया। मेरी चिकनी चूत की देखकर दोनों के मुह से एक बार फिर से लार टपकने लगा। वो दोनों मेरी चूत को एक साथ मिल कर चाटने लगे। मै बहोत गर्म हो चुकी थी। मेरी चूत के एक एक टुकड़े को एक साथ पी रहे थे।

बारी बारी मेरी चूत का रस पीकर मेरे को बहोत ही ज्यादा उत्तेजित कर दिया। कुछ देर तक तो उन दोनों ने अपनी अंगुली को ही मेरी चूत में अंदर बाहर करके चुदाई करने लगे। एक साथ चार चार अंगुली डाल कर मेरी चूत के छेद को फैला रहे थे। मै सिसकारियां भरकर अपनी चूत की मालिश कर रही थी। मै चुदने को तड़पने लगी। वो दोनों भी ज्यादा उत्तेजित लग रहे थे। वो मेरी बूब्स को दबाकर मेरी चूत चाट रहे थे। बिट्टू मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। अचानक मेरी चूत में धक्के मार कर वो अपना लंड अंदर घुसाने लगा। मेरी चूत में उसका आधा लंड ही घुसा दिया। मै “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की चीख निकाल रही थी।

वो मेरी चूत में अपना लंड आधे से ज्यादा घुसा दिया। मैं चीखें निकाल कर चुदवा रही थी। वो बार बार धक्के पर धक्का मार कर अपना लंड जड़ तक पेल दिया। विक्रम को कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। वो अपना हाथ लंड मेरे मुह में रख कर चुसाने लगा। मेरे मुह में वो अपना लंड चूत की तरह अंदर बाहर करने लगा। मेरे को चुदवाने में बहोत मजा आ रहा था। मै अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी। वो मेरे को जोर जोर से चोदने लगा। आज पहली बार दो मर्दो के साथ सम्भोग कर रही थी। वो दोनो मेरे साथ सम्भोग करके बहोत ही मजे ले रहे थे। बिट्टू की स्पीड धीरे धीरे बढ़ रही थी। वो तेजी से मेरी चूत फाड़ने लगा। वो मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डाला। बिट्टू झड़ने वाला हो चुका था। उसने मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर मुठ मारते हुए झड़ गया। विक्रम को मौक़ा मिलते ही उसने मेरे ऊपर चढ़ लिया।

मेरी टांगो को खोलकर वो अपना लंड पेलने लगा। मेरी चूत में उसका 7 इंच का लंड बहोत ही तेजी से घुस गया। वो और भी तेजी से अपना लंड मेरी चूत में घुसाने लगा। मेरी चूत का कचरा बना दिया। मै भी “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्ह ह..अ ई…अई…अई…..” की आवाज के साथ कमर को मटकाते हुए चुदवा रही थी। बिट्टू ने सिर्फ मेरी चूत को भरता बनाया था। लेकिंन विक्रम के लंड ने तो उसकी चटनी निकलवाने पर तुला था। वो तेजी से अपने लंड को मेरी चूत में कमर उछाल उछाल कर चुदाई कर रहा था। मैं भी उसका साथ दे रही थी। मेरे को बहोत ही आनंद आ रहा था। बिट्टू का लंड एक बार फिर से तैयार हो गया। विक्रम ने मेरी चूत से चटनी की निकाल दी।

मै “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”, की आवाज के साथ झड़ गयी। मेरी चूत से निकले माल को उन दोनों ने अपना मुह लगाकर पिया। पहली बार किसी ने मेरी चूत को इस तरह से चाटकर मजा दिया था। मेरे हसबैंड तो डायरेक्ट चुदाई पर ही भिड़ जाते थे। 8 10 झटकें मार कर झड़ जाते थे। आज मेरे को चुदाई का असली मजा आ रहा था।

विक्रम: भाभी आपकी चूत गीली होने के साथ साथ ढीली भी हो चुकी है। मेरे को ममजा नहीं आ रहा है

मै: चोदो! और चोदो! मेरी चूत को आज इसका सारा रस निकाल दो!

बिट्टू: भाभी मेरे को आपकी टाइट गांड चोदनी है( मेरी गांड पर हाथ मारते हुए बोला)

मै: ठीक है सालो चूत के साथ साथ गांड को भी फाड़ डालो!

इतना कहकर मैं खड़ी होकर झुक गयी। बिट्टू तेजी से मेरी गांड की तरफ लपकते हुए आ गया। बिट्टू ने मेरी गांड के छेद पर अपना लंड कुछ देर तक रगडा। उसके बाद छेद में अपना लंड धकेलने लगा। उसके लंड का टोपा बड़ी मुश्किल से मेरी गांड में घुसा था। वो जोर जोर से धक्के मार कर अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। पूरे लंड से वो मेरी जोरदार की चुदाई कर रहा था। मेरी गांड फट गयी। उधर मेरे मुह को पकड़कर विक्रम अपना गीला लंड चुसाने लगा। पहली बार मैंने उसके लंड पर लगे अपनी चूत के माल को चखा था। विक्रम मेरी जीभ के रगड़ से झड़ गया। बिट्टू दूसरी बार चुदाई कर रहा था। वो मेरी गांड में ही अपना लंड डाले हुए सारा माल निकाल दिया।

मेरे को गांड में कुछ गरमा गरम लगा। बिट्टू का लंड भी धीरे धीरे सिकुड़ कर बाहर निकल आया। हम तीनों रात भर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे। उस रात विक्रम और बिट्टू ने मेरी जवानी का खूब मजा लूटा। उसके बाद आज तक वो दोनों मौक़ा मिलते ही मेरे साथ सेक्स करना शुरू कर देते हैं। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।