कारखाने में खूबसूरत लड़की पटाकर चुदाई की

सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

मेरा नाम संजय मिश्रा है। मैं मुम्बई में रहता हूँ। मेरा खुद का कपडे का बड़ा कारखाना है। मेरे कारखाने में काफी वर्कर काम करते है। मैं भी देख रेख में हमेशा जुटा रहता हूँ। मेरा केबिन मेरे मैनेजर के केबिन के बगल में है। मैं और मेरा मैनेजर एक ही जैसे थे। वो भी कारखाने में काम करने वाली लड़कियों को देखकर मेरी तरह अपनी आँख सेंकता रहता था। हर लड़की को वो घूरता रहता था। मैं भी कभी कभी काम चेक करने के बहाने से ये सब कर लेता था। मेरे मैनेजर का नाम सुरेश था। मेरी तरह वो भी काफी स्मार्ट था। हम दोनों का काम चल रहा था। सुरेश कारखाने में कोई लड़की पटाता तो मेरे को भी उसके जिस्म से खेलने को बुलाता था। हम दोनों साथ मिलकर जवानी का मजा लूटते थे। बॉस होने की वजह से सब कायदे में रहते थे।

मेरा तो कभी दांव ही किसी को पटाने में नहीं लगता था। मैं अभी तक कुवांरा ही बैठा था। 28 साल की उम्र में भी मैं चोरी छिपे चूत का दर्शन करता था। जिस उम्र में लड़कों की शादी हो जाती है उसमें मै रंडीबाजी कर रहा था। अय्याशी करने का तरीका भी मेरा बहोत ही मजेदार था। काम ढूंढने आयी लड़कियों को एक बार चुदने को जरूर प्रेरित करता था। पसन्द आ जाती थी तो किसी न किसी तरह से पटाकर जरूर सम्भोग कर लेता था। लड़कियों की चूत की लत सी हो गयी थी। मैं कारखाने की लगभग सभी अच्छी लड़कियों को चोद चुका था। एक दिन मैं मैनेजर से बैठा बात कर रहा था।

मै: बड़े दिन हो गए चूत के दर्शन को! यार कुछ नया माल ढूंढ के लाओ

मैनेजर: क्या करूं सर जी! भूख तो मेरे को भी लगी है

मै: किसी को भी ले आ नौकरी के लिए उसे ही चोद दिया जायेगा

हमे क्या पता था कि जिस शिकार को हम ढूंढ रहे थे। वो खुद ही चलकर मेरे पास आ जायेगा। मैंने केबिन के अंदर शीशे में से ही एक लड़की को देखा। उस लड़की की उम्र 25 साल के करीब लग रही थी। मेरे को वो एक झलक में पसन्द आ गयी।

मै अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर देखने लगा। क्या मस्त फिगर था उसका! 36 30 34 के बदन को देखकर मेरे जिस्म में जान आ गयी। बॉडी की छाई सुस्ती बहोत तेजी से गायब सी हो गयी। वो बहोत ही गजब की माल लग रही थी। उसने लाल रंग का सलवार शूट पहन रखा था। परियों की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थी। उभरे हुए मम्मे को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैने मैनेजर को अपने केबिन से बाहर जाने को कहा। उसके लिए मैं खाली हो गया। मेरे को अकेला देखते ही वो दरवाजे को नॉक की।

लड़की: क्या मै अंदर आ सकती हूँ??

मै: हाँ आ जाओ!

लड़की: सर मेरा नाम लैला है। मैं ग्रैजुएशन फ़ाइनल कर चुकी हूँ। मेरे को जॉब की तलाश है। क्या आपके कारखाने में कोई जॉब मिल सकती है

मै: वैसे अभी तो कोई जगह नहीं खाली है। लेकिन दो दिन बाद एक लोग काम छोड़ना चाहते हैं तो आप उनकी जगह ले सकती है

लैला : थैंक यू सर

मैंने अपना विजिटिंग कार्ड पकड़ाया जिस पर मेरा एड्रेस सहित मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। वो अपनी गांड को मटकाती हुई चली गयी। जाते जाते मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा कर गयी। मै भी बहोत आश्चर्य में था कोई लड़की इतनी खूबसूरत कैसे हो सकती है। पहली बार मैंने किसी लडकी का इंतजार किया था। उस शाम को मैंने घर आकर उसका चमकीला बदन और बड़े बड़े चुच्चो को याद कर करके कई बार उसके नाम की मुठ मारी। किसी तरह से लंड हिला हिला कर अपना जोश ठंडा कर रहा था। दो दिन किसी तरह से बिताने के बाद उसके आने का बडी बेशब्री से इंतज़ार कर रहा था। दिन बीतने को था लेकिन वो मेरे को नहीं दिखी।

शाम को मैं बैठा उसी के बारे में सोच रहा था। तभी मेरा फ़ोन बजने लगा। मैंने एक बार फोन नहीं उठाया। दूसरी बार मैंने फोन उठाया तो लैला का ही फोन था। मेरे को उसका नंबर तो पता नहीं था। मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था। मै उससे बात करने लगा। धीरे धीरे एक एक बात बढ़ती गयी और उस दिन उससे लगभग 2आधे घंटे तक बात हुई। उसने मेरे को बताया कि वो बाहर कहीं गयी हुई थी। उसको आने में दो दिन लग जाता था। उसने मेरे को इन्फॉर्म किया था कि आप किसी और को काम पर रखना चाहो तो रख लो। मैंने तो पहले से उसे नौकरी दे रखी थी। दूसरे दिन भी उसका फ़ोन आया। और इस तरह से मैंने दो दिन उससे थोड़ा थोड़ा बात की। मुम्बई आते ही उसने मेरे कारखने में अपना काम करना शुरू कर दिया। उसको मैंने विलिंग का काम दिया हुआ था। विल वाला काउंटर मेरे केबिन के ठीक सामने ही था। मै पूरा दिन उसे ही ताड़ता रहता था। एक दिन शाम को मैं अपने घर जा रहा था। वो बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी। उधर से मै अपनी गाड़ी से जा रहा था। मेरे को लैला दिखी। मैंने गाडी उसके बगल में लगा दिया।

मै: यहां क्या कर रही हो?

लैला : घर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी।

मैंने उसके घर का एड्रेस पूछा तो वो मेरे घर के करीब में ही था। मेरे घर से उसका घर 3 किलोमीटर पहले ही पड़ता था। मैंने उसे अपनी गाड़ी में बिठाया और रास्ते भर बाते करते हुए उसके घर पर छोड़ दिया। इसी तरह का कार्यक्रम रोज रोज चलने लगा। धीरे धीरे हम एक दूसरे से हर एक बात शेयर करने लगे। रोजाना मैं उसे उसके घर छोड़ता था। एक दिन मैंने उससे कुछ ज्यादा ही सेक्सी बात कर दी। उसने मेरा साथ दिया। हर बात का जबाब दे रही थी। लैला भी मेरे से फ्रेंक हो चुकी थी। हम दोनों किसी किसी दिन होटल होटल जाते थे। उसके बाद मैं उसके घर उसे छोड़ने जाने लगा। इस तरह से मैंने उससे फ्रेंडशिप बढ़ाई। वो मेरे मेरे को भी लाइक करने लगी थी। एक दिन मैंने शॉपिंग पर उस ले कर गया हुआ था। मेरे लिए वो अच्छे अच्छे कपडे पसन्द कर रही थी।

उस दिन वो कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही थी। मैने उसकी काफी तारीफ़ भी की थी। अपनी तारीफ़ सुनकर उसने मेरे को किस कर लिया। मैं बहोत ही खुश था। उसको मैंने जीन्स और टॉप खरीद कर गिफ्ट दे दिया। वो दूसरे दिन वही पहन कर आयी हुई थी। मेरा लंड तो उसे देखते ही खड़ा हो गया। क्या मस्त माल लग रही थी। मैंने उसे अपने केबिन में बुलाकर किस किया। शाम को उसे सिनेमा दिखाने ले जाने का प्लान बनाया। मैंने मैनेजर से कह के दो टिकटें बुक करा ली। शाम को कारखाना बन्द होने के बाद मैंने लैला को अपनी गाड़ी में बिठाया। गाडी के सारे शीशे बंद करके उसे मैंने किस किया।

वो भी मेरा साथ दे रही थी। मेरे किस का जबाव देकर मेरे को अपने और ज्यादा करीब कर रही थी। मैंने गाडी में ही उसे ख़ूब किस किया। उसके चुच्चो को भी मैंने खूब मसला। उस दिन गाडी में लैला से चुदाई की खूब बाते की। उससे लंड बुर चूत गांड के बारे में बात करना आम बात सी हो गयी थी। मूवी में रोमांटिक सीन देखकर मैंने कोने की शीट पकड़ ली थी। वो मेरे साथ बैठकर देख रही थी। मैं उसे किस करने लगा। हम दोनो गर्म होने लगे थे। लैला तो मेरे को वही चुदने को तैयार लग रही थी। मैने उस दिन उसके साथ खूब चुम्मा चाटी करके उसके मम्मो को दबाया। दूसरे दिन मैंने उसे महंगा गिफ्ट दिया। हर दिन उसके लिए मैं कुछ न कुछ लेकर आता था। उसे भी पता था कि वो कभी भी चुद सकती है। अब हफ्ते में उसे एक बार जरूर से सिनेमा दिखाने ले जाता था। एक दिन उसे होटल लेकर गया हुआ था। उस दिन मेरा मूड उसे चोदने को बना गया था। मैंने उसे कार में ही सब कुछ बता रखा था।

मै: लैला तुम मेरे को तुम बहोत अच्छी लगती हो। जब से तुम्हे देखा है तब से बस तेरे ही बारे में सोचता रहता हूँ। मैं तुम्हे बहोत प्यार करने लगा हूँ। तुम्हारे सिवा किसी और लड़की को नहीं देखता हूँ

लैला : मैं भी तुम्हे बहोत प्यार करने लगी हूँ तुम को तो मैं पहली बार देखते ही मैंने अपना बॉयफ्रेंड बना लिया था। तुम मेरे बॉस थे इसीलिए मै चुप थी

मै: आज से तुम मेरी हर ख्वाहिश पूरी करोगी। आज मेरे साथ तुम रात बिताओगी लैला

डील फ़ाइनल करके ही मैं उसे आज होटल में लाया था। उसने मेरे को बहोत ही चुदासी नजरो से देखा। मैंने उसके साथ पहले खाना खाया उसके बाद पिज़्ज़ा पैक कराया। उसको मै अपने घर ले आया। लैला आज चुदने वाली थी। लैला हसी ख़ुशी से मेरे साथ मेरे घर पर आ गई। मै उसे अपने खुद के अकेले रहने वाले फ्लैट में ले गया। वहाँ मै अक्सर लड़कियों को लेकर जाता था। बड़े दिनों के बाद उस फ्लैट में कोई लड़की आयी हुई थी। नीचे गाडी पार्क करके अपने फ्लैट में जा रहा था। हम दोनों लिफ्ट में ही शुरू हो गए। मैंने उसे लिफ्ट में ही किस करना शुरू कर दिया। वो भी मेरा साथ दे रही थी।

हम दोनो बहोत ही गर्म हो गए थे। लिफ्ट से निकलते ही मैंने अपनी जेब से चाभी निकाली और अंदर कमरे में घुस गया। अपनी होंठो की प्यास को मैं लैला के होंठों को चूसकर बुझा रहा था। लैला को भी बहोत मजा आ रहा था। वो मेरा साथ खूब अच्छे से निभा रही थीं। एक दूसरे का साथ देकर हम दोनो किस का पूरा आनंद उठा रहे थे। मेरे को लैला की गुलाबी नाजुक नर्म होंठ को चूसकर मोटा कर दिया। उसके होंठ काफी फूल गए थे।

लैला के होंठो को काट काट कर चूसने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था। लैला की गर्मी को देखते हुये मैंने उसे गले पर किस करना शुरू कर दिया। गले पर किस करना उसको भारी पड़ गया। वो तड़पने लगी। बिस्तर को हाथो में समेटने लगी। अचानक से लैला मेरे से लिपट गयी। उसके बड़े बड़े चुच्चे मेरे सीने में लग रहे थे। मैंने अपने दोनों हाथो में भर लिया। दोनों चुच्चो को दबा दबा कर खूब मजा ले रहा था। मेरे उसके मुलायम मक्खन जैसे मम्मो को देखने का मन करने लगा। मैंने उसकी टी शर्ट को निकाल दिया। उसके बड़े बड़े गद्दे की तरह सॉफ्ट सॉफ्ट दूध ब्रा में फसे हुए थे। लैला के बदन लार लाल रंग की ब्रा बहोत ही ज्यादा मस्त लग रही थी। मैंने चुच्चो को आजाद करके उन्हें दबाने लगा। उसके भूरे निप्पलों को देखकर मेरा मन मचलने लगा। मैंने अपना मुह उसके चुच्चो को पीने के लिए निप्पलों पर लगा दिया। लैला की मुह से सिसकारी निकलने लगी। वो जोर जोर से सिसकने लगी।

मै खीच खीच कर उसके निप्पलों को पीने लगा। वो मेरे को अपने चुच्चो में दबा कर अपना दूध मस्ती से मेरे को पिला रही थी। मैंने कुछ देर निप्पल काट कर चुच्चो को चूसा। उसको नीचे बिठा दिया। उसका मुह ठीक मेरे लंड के सामने था। मैंने अपना पैंट खोलकर अंडरबियर सहित नीचे सरका दिया। मेरा लंड तना हुआ खड़ा था। लैला मेरे लंड को घूर घूर कर देख रही थी। मैंने अपने लंड को उसके होंठो पर रगड़ा। उसने अपना मुह खोला और मेरे लंड का टोपा अपने मुह में भर कर गपाक से अंदर कर ली। लंड के टोपे पर अपनी खुरदुरी जीभ लगाकर चाट रही थी। मेरे को बहोत मजा आ रहा था। धीरे धीरे मै बहोत ही उत्तेजित हो गया। मैने उसकी चुदाई के लिए उसे नंगा कर दिया। उसकी जीन्स को निकाल के उसे पैंटी में कर दिया।

पुतले की तरह वो बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसे भी और ज्यादा उत्तेजित करने के लिए उसकी पैंटी को निकाल कर उसकी चूत की एक झलक देखी। रस भरी चूत का रस पीने के लिए अपना मुह उसकी चूत पर लगा दिया। उसके चूत के टुकड़ो को बारी बारी चूसने लगा। वो जोर जोर से “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”, की आवाज निकालने लगी। मैंने चूत के दाने को काट काट कर उसे बहोत ही उत्तेजित कर दिया। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। उसकी चूत लोहे की तरह गर्म होकर लाल लाल हो गयी। मेरा लंड भी लोहे की सलाखों की।तरह टाइट था। लंड को उसकी चूत के छेद से सटाकर जोर से धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुसा था कि वो जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीख निकाल दी।

मैंने धक्के पर धक्का मार कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। वो जोर जोर से चिल्ला रही थी। धीरे धीरे उसकी चुदाई शुरू कर दी। वो धीरे धीरे से सिसकारियां भरने लगी। मैंने अपना लंड धका पेल पेलना शुरू कर दिया। पूरा लंड जड़ तक पेलना शुरू कर दिया। वो सुसुक सुसुक कर चुदवा रही थी। मेरा मोटा लंड खानें में उसे भी बहोत ही मजा आ रहा था। वो अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने जोरदार की चुदाई करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते मेरे लंड ने अपनी स्पीड पकड़ ली। जोर जोर से लैला की चूत में अपना लंड घुसा कर निकाल रहा था। लैला अपनी गांड उठा उठा कर सेक्स का पूरा मजा लेने लगी। वो “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज के साथ चुद रही थी। मैंने अपना पोजीशन बदला उसकी चूत से सटाकर अपने लंड पर बिठाकर चोदने लगा। वो खुद ही उछल के सम्भोग का पूरा मजा लेने लगी। वो लोहे की सलाखों जैसे मेरे लंड पर उठ बैठ रही थी।

लैला की चूत ने पानी छोड़ दिया। उसकी चूत ढीली पड़ चुकी थी। मेरे को अब चूत चुदाई में मजा नहीं आ रहा था। मैंने लैला को कुतिया बनाया। उसकी गांड की छेद पर लंड अंदर घुसाने लगे। मेरे लंड का टोपा ही अंदर घुसा था कि उसकी गांड फट गई। वो बहोत तेज से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज निकालने लगी। मैंने उसकी गांड में जोर से धक्का मार मार कर अपना लंड घुसा दिया। लैला की गांड पर हाथ मार मार कर गांड चुदाई कर रहा था। लैला भी अपनी गांड मटका मटका कर सम्भोग में पूरा योगदान कर रही थीं। मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर जोर से चुदाई शुरू कर दी। वो पूरा बेड चर्र…चर्र…चर्र… की आवाज के साथ हिल रहा था।

उसकी टाइट गांड में मेरा लंड रागड़ खाकर जल्दी ही झड़ने वाला हो गया। झड़ने से पहले मेरी स्पीड बहोत ही तेज हो गयी। उसकी गांड को फाड़कर हलवा बना रहा था। वो “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की चीख अपने मुह से निकाल रही थी। उसकी आवाज कुछ देर बाद निकलना बंद हो गयी। मैंने चुदाई रोक दी। मेरा लंड उसकी गांड में ही स्खलित हो गया। सारा गरमा गरम माल उसकी गांड में भर गया। मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाल लिया। उसकी गांड से मेरा माल बहने लगा। हम दोनों थक चुके थे। नंगे ही पूरी रात लेटे रहे। उस रात मैंने लैला की कई बार उसकी चुदाई की। उसके बाद उसे कई जगहों पर चोदा। कभी होटल तो कभी कारखाने में और भी जगहों पर ले जाकर उसके साथ सम्भोग किया। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।